प्रयागराज, जागरण संवाददाता। महंत नरेंद्र गिरि की मृत्यु की जांच कर रही केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआइ) की टीम अब तक 168 लोगों का बयान दर्ज कर चुकी है। साथ ही विवेचक की ओर से 18 पर्चा भी काटा जा चुका है, लेकिन घटना के एक माह बाद भी कोई नतीजा नहीं निकल सका। अदालत में सीबीआइ के अधिकारियों की ओर से बताया गया है कि विवेचना अभी प्रारंभिक स्तर पर ही चल रही है। ऐसे में जांच की धीमी प्रगति को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

आत्महत्या के ही पहलू पर हो रही तहकीकात

महंत नरेंद्र गिरि की मृत्यु के बाद उनके शव का पोस्टमार्टम करवाया गया था। डाक्टरों ने विसरा सुरक्षित करते हुए उसे फाेरेंसिक लैब भेजा था, ताकि मृत्यु का कारण स्पष्ट हो सके। इसके अलावा श्रीमठ बाघम्बरी गद्दी के जिस अतिथि कक्ष में महंत की संदिग्ध दशा में मृत्यु हुई थी, वहां से रस्सी, चाकू, मोबाइल समेत कई साक्ष्य संकलित किए गए थे और उन्हें भी फोरेंसिक लैब भेजा गया था। सुसाइड नोट नरेंद्र गिरि ने ही लिखा है, इसकी जांच भी हैंड राइटिंग एक्सपर्ट से करवाई जा रही है। मगर अब तक न तो फोरेंसिक रिपोर्ट आई है और न ही राइटिंग एक्सपर्ट की रिपोर्ट। अलबत्ता सीबीआइ के अधिकारियों ने महंत के अधिवक्ता से वसीयतनामा में किए गए हस्ताक्षर का नमूना लेकर जांच को आगे बढ़ा रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि सीबीआइ टीम अभी आत्महत्या के बिंदु पर ही गहराई से छानबीन कर रही है। जिन लोगों के बयान अभी तक दर्ज किए गए हैं, उसमें तमाम संतों, मठ और मंदिर से जुड़े लोगों, महंत व आनंद गिरि से संपर्क रखने वाले शख्स शामिल हैं। पूछताछ के दौरान जिनके नाम प्रकाश में आए, उनका भी बयान लिया गया है। इस आधार पर माना जा रहा है कि घटना के संबंध में अभी और भी कई लोगों से सवाल किया जा सकता है। 20 सितंबर की शाम महंत नरेंद्र गिरि की संदिग्ध दशा में मृत्यु हुई थी, जिसकी जांच सीबीआइ दिल्ली की टीम कर रही है।

सीबीआइ कोर्ट में जल्द ट्रांसफर होगा केस 

यह भी कहा जा रहा है कि नरेंद्र गिरि का केस जल्द ही सीबीआइ लखनऊ की कोर्ट में ट्रांसफर हो जाएगा। ऐसा होने पर नैनी जेल में निरुद्ध अभियुक्त आनंद गिरि, मंदिर के पूर्व पुजारी आद्या प्रसाद तिवारी और उसके बेटे संदीप तिवारी को लखनऊ जेल स्थानांतरित कर दिया जाएगा। अभियुक्तों की न्यायिक अभिरक्षा 12 नवंबर तक बढ़ाई गई है।

Edited By: Ankur Tripathi