प्रयागराज,जेएनएन । सिर पर पगड़ी, साफ कपड़े, नंगे पांव और जुबां पर ओम नम: शिवाय का जाप। यह दृश्य है माघ मेले के विभिन्न अन्न क्षेत्रों में भंडारों की रसोई का जहां बड़े-बड़े कड़ाहों पर तैयार होने वाला सात्विक भोजन संस्कार भी सीख रहे हैं। सामग्री बनाने से लेकर सलीके से बैठाकर परोसने तक में प्राचीन भारतीय संस्कार की झलक दिखती है। भोजन बनाने और खाने से पहले अन्नदाता व भगवान को नमन करना संस्कृति के दर्शन कराते हैं। साधु संन्यासियों के शामिल होने से भोजन प्रसाद स्वरूप हो गया है।

तमाम शिविरों में चल रहे हैं भंडारे

माघ मेला क्षेत्र में महावीर मार्ग पर स्थित पांटून पुल संख्या एक के पास महंत नृत्य गोपालदास के शिविर व आधा दर्जन अन्य स्थानों पर विशाल भंडारे चल रहे हैं। संगम मार्ग पर ओम नम: शिवाय के अन्न क्षेत्र में रसोई पर चढ़े विशाल कड़ाहे और उसमें सब्जियां बनाने के लिए तीन से चार लोगों की एक साथ मेहनत हर किसी को आश्चर्य चकित कर रही है।

भूमि पर बैठकर खाने से शरीर में इसकी पौष्टिकता बढ़ जाती है

शिविर के संचालक 'प्रभु जी कहते हैं कि भगवान की कृपा से बारिश होती है और बारिश अच्छी होने पर कृषकों की मेहनत से अन्न की उपज होती है। इसलिए भोजन बनाने और खाने से पहले इनको नहीं भूलना चाहिए। महंत नृत्य गोपाल दास के शिविर में श्रद्धालुओं को भोजन परोस रहे प्रेम पुजारी और अनंत दास का कहना है कि भूमि पर बैठकर खाने से शरीर में इसकी पौष्टिकता बढ़ जाती है। यही भोजन करने के संस्कार भी हैं।

Posted By: Brijesh Srivastava

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