जेएनएन, प्रयागराज। प्रदेश के संस्कृत कालेजों में गुपचुप तरीके से चल रही अनियमित नियुक्तियों पर रोक लग गई है। शासन ने प्रदेश के कई जिलों से मिलने वाली शिकायतों को देखते यह निर्देश दिया है। संबंधित जिलों से रिपोर्ट भी मांगी गई है। यह भी निर्देश हैं कि कालेजों के प्रबंधक जिला विद्यालय निरीक्षकों से अनुमति लेकर ऐसा कर रहे हैं, प्रक्रिया शासन के निर्देशों के विपरीत है। प्रदेश के संस्कृत महाविद्यालयों और माध्यमिक कालेजों में शिक्षकों का पारदर्शी तरीके से चयन करने के निर्देश हैं। माध्यमिक कालेजों के निर्देश हो चुके हैं, जबकि महाविद्यालयों की चयन प्रक्रिया को लेकर मंथन जारी है।

शिक्षकों की अनियमित तरीके से नियुक्तियां

प्रयागराज, फैजाबाद और आजमगढ़ मंडलों के जिलों में महाविद्यालय व माध्यमिक कालेजों में शिक्षकों की अनियमित तरीके से नियुक्तियां की गई। शासन में टीकरमाफी संस्कृत विद्यालय सुलतानपुर, दयाराम संस्कृत पाठशाला चंद्रेश्वर आजमगढ़ और प्रतापगढ़ जिले के माध्यमिक व महाविद्यालयों में अनियमित तरीके से नियुक्तियों की लिखित शिकायत पहुंची। संयुक्त सचिव जयशंकर दुबे ने तीनों मंडलों के संयुक्त शिक्षा निदेशकों को निर्देश दिया है कि वे अनियमित नियुक्तियों की कार्यवाही तत्काल रोक दें। उप मुख्यमंत्री ने संबंधित जिलों से रिपोर्ट भी मांगी है। शिक्षा निदेशक माध्यमिक को निर्देश हुए हैं कि संस्कृत कालेजों में अनियमित नियुक्तियां न होने पाएं। 

वेतन भुगतान की जांच कर रिपोर्ट भेजें

मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशकों ने अपने जिलों के डीआइओएस को निर्देश दिया कि पिछले दो वर्ष में की गई नवनियुक्ति व वेतन भुगतान की जांच करके रिपोर्ट भेजें। इसमें नियुक्तियों का विज्ञापन, प्रशासन योजना, पद सृजन की प्रमाणित प्रति, रिक्ति का कारण, अनुमोदन की प्रति और भुगतान आदेश की प्रति भी मांगी गई। यह भी निर्देश हुआ कि कुछ जिलों में डीआइओएस से कालेज प्रबंधकों ने अनुज्ञा लेकर नियुक्तियां की हैं, यह प्रक्रिया शासन के निर्देशों के प्रतिकूल है। इस आदेश से खलबली मची है। 

चयन बोर्ड को जिम्मा, चयन ठप 

प्रदेश सरकार ने संस्कृत माध्यमिक कालेजों में शिक्षकों का चयन का जिम्मा माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड उप्र को सौंपा है। इसके लिए निर्देश हुए कि अब चयन से पहले उनकी लिखित परीक्षा होगी। यह भी निर्देश हुआ कि जरूरी हो तो नियमावली में बदलाव का प्रस्ताव दिया जाए। आदेश होने के बाद से अब तक चयन बोर्ड ने इस दिशा में कदम नहीं बढ़ाया है। इसीलिए कालेज संचालकों को अनियमित नियुक्ति का मौका मिल रहा है। 

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Posted By: Nawal Mishra