प्रयागराज, जेएनएन। माघ मेले में आए श्रद्धालुओं को खाना खिलाने के लिए साधु-संतों के शिविरों में नित्‍य भंडारे का आयोजन किया जा रहा है। भंडारे में रोज लाखों लोगों के पेट की क्षुधा शांत होती है। इस काम को अंजाम देते हैं कारीगर, जिन्‍हें सेवादार कहा जाता है। वह घर, परिवार और अपने निजी काम-धंधे महीने भर के लिए बंद कर प्रयागराज में रहते हैं। रसोई में रोजाना 12 से 15 घंटे तक पूरी शिद्दत से जुटे हैं। यह कई आश्रमों के सेवादार हैं। सेवादारों का भाव है कि भूखे लोगों का पेट भर जाए, इससे बड़ा गंगा स्नान और पुण्य क्या हो सकता है।

भंडारा संचालकों से अधिक जिम्‍मेदारी खाना बनाने वालों की होती है

माघ मेले में जितने भी अन्न क्षेत्र में रसोई दिन-रात भूखे लोगों को खाना खिला रही है, उसमें भंडारा संचालकों से बड़ी जिम्मेदारी खाना बनाने वालों की है। खाना कितने तरह का बनाना है, बड़े-बड़े कड़ाहों में दाल, सब्जी से लेकर अन्य सामग्री तक किस तरह से बनानी है और एक बारगी उमडऩे वाले हुजूम को समय पर खाना मिल जाए, इसे निभा पाना हर किसी के वश की बात नहीं। संगम अपर मार्ग पर संचालित ओम नम: शिवाय संस्था में रसोई संभालने वाले लोग कानपुर, लखनऊ सहित अन्य जिलों से आए हैं। अन्य शिविरों में भी चल रही रसोई में कोई कारीगर चेन्नई से आया है तो मणिराम छावनी अयोध्या के महंत नृत्य गोपाल दास के महावीर मार्ग पांटून पुल संख्या एक के समीप चल रहे भंडारे में खाना साधु संन्यासी ही बना रहे हैं।

हमारा गंगा स्नान रसोई से ही होता है : विजय

ओम नम: शिवाय संस्था की रसोई में कारीगरों के प्रमुख आजमगढ़ निवासी विजय बहादुर कहते हैं कि हम लोगों का गंगा स्नान रसोई से ही होता है। प्रमुख पर्वों पर भी संगम तक नहीं जा पाते जबकि कुछ ही दूरी पर है। अयोध्या निवासी विशाल साहू तो रसोई को ही त्रिवेणी संगम मानते हैं। कहते हैं कि भूखे लोगों को खाना खिला देते हैं, ये सेवा ही उनके दिल को संतुष्टि देती है।

मन से सेवा करने का सुखद परिणाम भगवान देता है : गोपाल

महंत नृत्य गोपाल दास के शिविर में सब्जी बना रहे संन्यासी गोपाल ब्रह्मचारी ने कहते हैं कि मन से सेवा की जाए तो फिर उसका सुखद परिणाम भगवान देता है। कुछ यही कहना दंडी स्वामी नगर में चल रहे भंडारे की रसोई के कारीगर हरीराम का भी है। इन आश्रमों में रोजाना हजारों लोग भोजन कर रहे हैं। यह भंडारा सुबह से लेकर देर रात तक चलता है।

Posted By: Brijesh Srivastava

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