प्रयागराज, जागरण संवाददाता। अस्थमा के रोगियों को कड़ाके की सर्दी के दौरान सांस लेने में दिक्कत महसूस होती है। फेफड़े में जकडऩ हो जाती है। श्वांस संबंधी अन्य रोगी, हृदय रोगी, ब्लड प्रेशर, मधुमेह यानी शुगर वाले रोगी, दिमाग की नसों में सूजन वाली रोगी अपनी सेहत के प्रति ज्यादा सतर्क रहें। जिन्हें भोर में ही जागने की आदत है और मार्निंग वाक पर निकलते हैं उन पर भी घर से अचानक बाहर निकलना ज्यादा खतरनाक हो सकता है। क्योंकि रजाई या कंबल से निकलकर तुरंत बाथरूम में जाने या खुले आकाश के नीचे निकलने से हार्ट अटैक या ब्रेन स्ट्रोक का खतरा ज्यादा रहता है।

20 प्रतिशत रोगियों की संख्‍या बढ़ी

सुबह और रात की ठंड तथा दिन के समय भी हवा में गलन जानलेवा हो रही है। सर्दी जुकाम, नेजल यानी नाक में दिक्कतों के अलावा उन्हें इस मौसम में ज्यादा खतरा है जो दमा, फेफड़े, हृदय के रोगी या फिर ब्लड प्रेशर, शुगर और दिमाग की नसों में होने वाली बीमारियों से पहले से ग्रसित हैं। अस्पतालों में अनुमानित तौर पर 20 प्रतिशत रोगी ज्यादा हो गए हैं। डाक्टरों ने बच्चों की सेहत का विशेष ध्यान रखने को कहा है।

दिक्‍कत महसूस हो तो चिकित्‍सक से संपर्क करें : डाक्‍टर संजीव

काल्विन अस्पताल के वरिष्ठ फिजीशियन डा. संजीव यादव कहते हैं कि आजकल ओपीडी में सर्दी जुकाम, हड्डियों और मांसपेशियों में दर्द के अलावा ब्रेन स्ट्रोक व छाती में दर्द की परेशानी बताने के लिए लोग ज्यादा आ रहे हैं। कहा कि कोई भी दिक्कत महसूस हो तो डाक्टरों को तत्काल दिखाएं।

दवाएं नियमित लें और सर्दी के मौसम में करें बचाव : डाक्‍टर अखौरी

बेली अस्पताल के नोडल अधिकारी डा. एमके अखौरी ने कहा है कि आजकल के मौसम में जो भी लोग बीपी, शुगर, हार्ट या अस्थमा की बीमारी होने पर दवाएं ले रहे हैं वह दवाओं की डोज के नियम से खिलवाड़ न करें। कहा कि दवाएं नियमित लें और सर्दी के मौसम में बचाव करें। यह भी कहा कि बड़े बुजुर्ग अपने साथ ही इस मौसम में बच्चों का भी ध्यान रखें।

Edited By: Brijesh Srivastava