प्रतापगढ़, जेएनएन। यह सच है कि आंवला से प्रतापगढ़ की पहचान है। इसके साथ ही यह फल बेशुमार गुणों का खजाना होने के चलते ही इसे 'अमृत फल' कहा जाता है। प्रतापगढ़ में आंवले की कई किस्में पैदा होती हैं। इन दिनों कोरोना वायरस के संक्रमण काल में इम्युनिटी बढ़ाने के लिए आंवले के उत्पाद का लोग सेवन कर रहे हैं। आंवला खाने की सलाह चिकित्सक भी दे रहे हैं।

रोगों से लडऩे की क्षमता बढ़ाने में मददगार है आंवला : डाॅ. आरपी चौबे

प्रतापगढ़ के वरिष्ठ चिकित्सक डाॅ. आरपी चौबे कहते हैं कि आंवले में विटामिन सी होता है। यह रोगों से लडऩे की क्षमता बढ़ाने में मददगार होता है। डीएफओ बीआर अहीरवार कहते हैं कि जो प्रतापगढ़ जिले का आंवला आकार में बड़ा व गुणों में विशेषताओं से युक्त होता है। गुण के बल पर ही तमाम समस्याओं के बावजूद प्रतापगढ़ के आंवले की पहचान कायम है। आंवले के बाग जिले में बड़े पैमाने पर हैं। बेनीपुर, लोहंगपुर, गोबरी, पट्टी, सदर और संडवा चंद्रिका ब्लाक के कमास, गोड़े क्षेत्र में इसकी बागवानी होती है। इनमें देशी, चकैया जैसी किस्म के आंवले होते हैं। प्रतापगढ़ का आंवला च्यवनप्राश बनाने में जमकर उपयोग होता है।

आंवला प्रशिक्षण केंद्र की जरूरत है

जिला उद्यान विभाग आंवले के बागों को कटने से बचाने में लगा है। नए बाग लगाने के लिए लक्ष्य तक निर्धारित कर दिया है। पिछले साल सांसद रहे हरिवंश सिंह ने आंवले के किसानों को समस्याओं से मुक्त करने की पहले की थी। यहां पर प्रसंस्करण यूनिट खोलने की बात कही थी। ऐसा होता तो आढ़तियों को नहीं, बल्कि उसे खरीदने वाली कंपनियों से सीधे सौदा किसान करते। जिले में अब भी आंवला प्रशिक्षण केंद्र की जरूरत है। अमृत फल आंवला को पूज्यनीय दर्जा हासिल है। इसमें वास्तुदोष दूर करने का गुण भी पाया जाता है। यहां तक कि इसकी छांव भी रोग विनाशक है।

 

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