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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Mar 24, 2018 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

देश के टॉप टेन अन्वेषकों में इविवि के तीन वैज्ञानिक

By JagranEdited By:
Published: Sat, 24 Mar 2018 03:04 AM (IST)

जासं, इलाहाबाद : इलाहाबाद विश्वविद्यालय के खाते में एक और उपलब्धि जुड़ गई है। विश्वविद्यालय के न

देश के टॉप टेन अन्वेषकों में इविवि के तीन वैज्ञानिक
देश के टॉप टेन अन्वेषकों में इविवि के तीन वैज्ञानिक

जासं, इलाहाबाद : इलाहाबाद विश्वविद्यालय के खाते में एक और उपलब्धि जुड़ गई है। विश्वविद्यालय के नवप्रवर्तन क्लब के तीन वैज्ञानिक देश के टॉप टेन अन्वेषकों में शामिल हो गए हैं। राष्ट्रपति भवन द्वारा नई दिल्ली में आयोजित 20-21 मार्च को नवप्रवर्तन एवं उद्यमिता उत्सव में देश के 70 प्रमुख संस्थानों से आए अन्वेषकों ने अपने अपने शोध को प्रस्तुत किए थे। राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने इन 10 वैज्ञानिकों के द्वारा किए गए शोध को सराहा है और जन जन तक पहुंचाने को कहा है।

इलाहाबाद विश्वविद्यालय के नवप्रवर्तन क्लब के सदस्य जैव प्रौद्योगिकी विभाग के प्रो. एमपी सिंह, भौतिकविज्ञानी प्रो. लोकेंद्र कुमार व जैव प्रौद्योगिकी विभाग के डॉ. अवध बिहारी यादव ने राष्ट्रपति भवन में 20 व 21 मार्च में आयोजित नवप्रवर्तन एवं उद्यमिता के उत्सव में प्रतिभाग किया । डॉ. लोकेंद्र कुमार ने नई पीढ़ी के सोलर सेल की डिजाइन एवं संचालन पर अपना शोध प्रस्तुत किया। यह शोध पारंपरिक उपलब्ध अकार्बनिक सिलिकॉन सोलर सेल से अलग है। इस तकनीकी के उपयोग से सोलर सेल के कपड़े और इमारतों के शीशे एवं पेंट ही सोलर सेल का कार्य करेंगे। इस तकनीकी का मुख्य उद्देश्य अत्यंत कम लागत में कुशल यंत्रों का निर्माण करना है।

जैव प्रौद्योगिकी विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. एमपी सिंह ने कम लागत वाली मशरूम कृषि प्रौद्योगिकी का आविष्कार किया है। मशरूम कृषि प्रौद्योगिकी के लिए कृषि अपशिष्ट पुआल, भूसा व पानी के उपयोग से जैविक तरीके से बहुत कम लागत में मशरूम उगाया है। इससे अपशिष्ट का निपटान और पोषण की कमी दोनों समस्याओं का एक साथ समाधान होता है। यह प्रौद्योगिकी अशिक्षित एवं अकुशल गरीब किसानों को सामाजिक आर्थिक रूप से उन्नत करती है। इस तकनीकी का उपयोग कोयला और डाई उद्योगों से प्रवाहित होने वाले भारी और विषैले धातुओं के प्रभाव को कम करने में भी किया जा सकता है। डॉ. अवध बिहारी यादव ने सस्ते जैव सैनिटरी नैपकिन को विकसित किया है। उन्होंने सस्ते उपलब्ध जैव पदार्थो जैसे केले और अनानाश के रेशे आदि का उपयोग करके इस नैपकिन को तैयार किया है। यह मात्र दो रुपये में रेलवे स्टेशनों व अन्य स्थानों पर उपलब्ध होगी। यह नवप्रवर्तन 23 प्रतिशत स्कूली छात्राओं को मासिक धर्म के समय होने वाले संक्रमण से बचाएगा।

कोई भी इनोवेटिव तकनीकी, सोलर सेल व सैनिटरी नेपकिन। हर्ष वर्धन व सचिव आशुतोष शर्मा राष्ट्रपति व उनके सचिव संजय कोठारी थे।