प्रयागराज, जेएनएन। पूर्व केंद्रीय मंत्री स्वामी चिन्मयानंद सरस्वती के खिलाफ शाहजहांपुर में उन्हीं की शिष्या द्वारा दर्ज कराये गए दुष्कर्म केस को वापस लेने के राज्य सरकार के फैसले को खारिज करने के सीजेएम के आदेश पर हस्तक्षेप करने से इन्कार कर दिया है। अदालत ने कहा कि याची अदालत में समर्पण कर जमानत अर्जी दाखिल करें तथा कोर्ट नियमानुसार तय करें।

30 अक्तूबर तक उत्पीड़नात्मक कार्रवाई पर रोक

हाई कोर्ट ने 30 अक्टूबर तक स्वामी चिन्मयानंद के खिलाफ उत्पीड़नात्मक कार्रवाई पर रोक लगा दी है। साथ ही केस वापसी मामले में यह कहते हुए न्यायालय ने राहत देने से इन्कार कर दिया है कि कानून सबके लिए बराबर है। यह आदेश न्यायमूर्ति राहुल चतुर्वेदी ने स्वामी चिन्मयानंद की अधीनस्थ अदालत के आदेश की वैधता की चुनौती याचिका को खारिज करते हुए दिया है।

पुलिस ने दाखिल की है स्वामी चिन्मयानंद के खिलाफ चार्जशीट

स्वामी चिन्मयानंद के खिलाफ दुष्कर्म मामले में पुलिस ने चार्जशीट दाखिल की है। राज्य सरकार ने केस वापस लेने का फैसला लिया। उसे निचली अदालत ने अस्वीकार कर दिया। उसी आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दी गई थी।

उल्लेखनीय है कि स्वामी चिन्यमानंद पर दुष्कर्म का मुकदमा दर्ज होने का यह मामला लंबे समय तक मीडिया में सुर्खियों में बना रहा। आऱोप लगाने वाली शिष्या ने शुरू में तमाम इल्जाम लगाए लेकिन बाद में वह भी पीछे हट गई थी। अब सरकार ने केस वापस लेने का फैसला किया लेकिन अदालत ने इसे अस्वीकार कर दिया।

Edited By: Ankur Tripathi

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