प्रयागराज, जेएनएन। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कानपुर देहात के मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) व जिला पंचायतराज अधिकारी (डीपीआरओ) को 22 अक्टूबर को हाजिर होने का निर्देश दिया है। इससे पहले उन्हें वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये कोर्ट की सुनवाई में हाजिर होने का आदेश दिया गया था, लेकिन सूचना के बावजूद इसका पालन नहीं किया गया। इस पर कोर्ट ने व्यक्तिगत तौर पर हाजिर होने का आदेश दिया है।

न्यायमूर्ति अजय भनोट ने यह आदेश सुनीता देवी की याचिका पर दिया है। याचिका पर अधिवक्ता मुजीब अहमद सिद्दीकी ने बहस की। सुनीता देवी ने डीपीआरओ के भ्रष्टाचार के खिलाफ शिकायत की थी। डीपीआरओ ने उसका तबादला सरवनखेडा विकासखंड की ग्राम पंचायत से मालसा विकासखंड की ग्राम पंचायत मालसा में कर दिया था। सुनीता ने मालसा में कार्यभार ग्रहण कर लिया है। अब उसकी जांच शुरू करके कारण बताओ नोटिस जारी की गई है। इसे हाई कोर्ट में चुनौती दी गई है।

हाई कोर्ट ने सरकारी वकील से तबादला करने वाले जिला पंचायतराज अधिकारी के बारे में ब्योरे के साथ जानकारी मांगी थी। साथ ही मुख्य विकास अधिकारी द्वारा तबादले के अनुमोदन का आदेश पेश करने का निर्देश दिया था। कोर्ट ने जानकारी न दिए जाने पर सीडीओ व डीपीआरओ को बीती 12 अक्टूबर को कोर्ट में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये हाजिर होने को कहा था, लेकिन दोनों अधिकारियों ने न तो कोई जानकारी दी और न ही वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से हाजिर हुए।

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