प्रयागराज, जेएनएन। वैशाख शुक्लपक्ष की तृतीया तिथि आज शुक्रवार को अक्षय तृतीया के रूप में मनाई जा रही है। अक्षय अर्थात जिसका कभी क्षय न हो है। इस दिन किया गया जप, तप, दान व क्रय अक्षय फल देता है। इसी कारण इसे 'अक्षय तृतीया कहते हैं। भविष्य पुराण, मत्स्य पुराण, पद्म पुराण, स्कंद पुराण में इस तिथि का विशेष उल्लेख है। सुख-समृद्धि की प्रतीक उक्त तिथि पर भगवान परशुराम का प्राकट्य हुआ था। सनातन धर्म में अक्षय तृतीया का बहुत महत्व है।  गृहप्रवेश, नींव पूजा, नए व्यवसाय की शुरुआत, नई नौकरी की शुरुआत, नई वस्तुएं खरीदने व विवाह करने की यह सबसे उत्तम तिथि मानी जाती है।

अक्षय तृतीया पर भगवान विष्णु व माता लक्ष्मी के पूजन का विधान है। सुबह गंगा, यमुना, संगम अथवा किसी पवित्र नदी में स्नान करके भगवान विष्णु व माता लक्ष्मी का पूजन करना चाहिए। फिर यथा सामर्थ्य नई वस्तु व कपड़ा खरीदना चाहिए। इससे घर में लक्ष्मी व वैभव का वास होता है।  

कर सकते हैं ऑनलाइन बुकिंग

ज्योतिषाचार्य अमित बहोरे बताते हैं कि शुक्रवार को उदया तिथि में रोहिणी नक्षत्र रहेगा। इससे अक्षय तिथि का महत्व कई गुना बढ़ गया है। दिनभर उसका शुभ मुहूर्त है। लेकिन, प्रात: 5.38 से दोपहर 12.15 बजे तक विशेष शुभ मुहूर्त है। कोविड-19 नियम लागू होने के कारण बाजार बंद रहेंगे। ऐसी स्थिति में ऑनलाइन बुकिंग करना भी शुभ रहेगा। सोना, चांदी, कपड़े या वाहन आदि के ऑनलाइन बुकिंग करने से भी उसका पुण्य अक्षय रहेगा।

दान का है विशेष महत्व

अक्षय तृतीया के दिन दान करने का विशेष महत्व है। दान ब्राह्मणों अथवा किसी जरूरतमंद व्यक्ति को दिया जा सकता है। उन्हें भोजन कराकर यथासंभव दान करने से उसका पुण्य कई गुना बढ़ा जाता है। इस दिन अच्छे मन से देशी घी, शक्कर, अनाज, फल-सब्जी, कपड़े, इलेक्ट्रानिक सामान और सोने-चांदी का दान करना चाहिए।