प्रधानमंत्री को क्लीन चिट मिलने पर अधिवक्ताओं में हर्ष

प्रयागराज : गुलबर्ग सोसायटी अहमदाबाद दंगे में एसआइटी द्वारा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को दिए गए क्लीन चिट के खिलाफ दाखिल याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है। इस फैसले पर इलाहाबाद हाई कोर्ट के वकीलों ने हर्ष व्यक्त किया है। कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने सांच को आंच नहीं के सिद्धांत को फलीभूत किया गया। भाजपा प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य अधिवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने कहा कि कांग्रेस की तत्कालीन मुख्यमंत्री मोदी को गुजरात दंगे में फंसाने की कोशिश विफल हुई है। प्रयागराज अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष नरेंद्र कुमार चटर्जी ने कहा कि गोधरा साबरमती ट्रेन को आग के हवाले करने की प्रतिक्रिया में हुए गुजरात दंगे में सरकार को कटघरे में खड़ा कर बदनाम करने की कोशिश की गई। इस फैसले से जिसका पटाक्षेप हो गया है। पूर्व शासकीय अधिवक्ता अरुण कुमार मिश्र ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले से मोदी को दंगे में फंसाने की चाल विफल हो गई है। केंद्र सरकार के अधिवक्ता कृष्ण जी शुक्ल ने कहा कि कांग्रेस पार्टी की मुखिया की नरेंद्र मोदी को फंसाने की चाल को सुप्रीम कोर्ट ने तगड़ा झटका दिया है। हाई कोर्ट के पुस्तकालय हाल में हुई अधिवक्ताओं की बैठक हुई। इसमें शामिल केडी मालवीय, राजेश त्रिपाठी, पूजा मिश्रा, अर्विंद गोस्वामी, अखिलेश कुमार शुक्ल, संजय यादव, कुंवर बालमुकुंद सिंह, आत्म प्रकाश त्रिपाठी, विनय मिश्रा, सीपी गुप्ता, अतुल पांडेय ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर प्रसन्नता व्यक्त की।

अनुसूचित जाति बहुल बस्ती के बीच में डंपिंग यार्ड बनाने पर डीएम जौनपुर से मांगी जानकारी

प्रयागराज : इलाहाबाद हाई कोर्ट ने जौनपुर के जमालपुर गांव की अनुसूचित जाति बहुल बस्ती के बीच आबादी में सालिड बेस्ट मैनेजमेंट प्लांट स्थापित करने के खिलाफ याचिका पर राज्य सरकार से जानकारी मांगी है। याचिका की सुनवाई 30 जून को होगी। यह आदेश न्यायमूर्ति सुनीता अग्रवाल व न्यायमूर्ति विक्रम डी. चौहान की खंडपीठ ने पारसनाथ वह चार अन्य की जनहित याचिका पर दिया है। याची का कहना है कि राजस्व रिकार्ड में जो जमीन अनुसूचित जाति बहुल बस्ती के नाम दर्ज है। बस्ती के बीचोबीच कूड़ा संयंत्र लगाया जा रहा है, जिससे लोगों के स्वास्थ्य को गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया है। याचिका में प्लांट स्थापित करने पर रोक लगाने की मांग की गई है। याची का कहना है कि जिलाधिकारी ने पांच मार्च 2022 को बस्ती की जमीन नगर पंचायत को सौंपी है। इस पर याचियों ने आपत्ति जताई है, लेकिन उस पर कोई निर्णय नहीं लिया गया है।

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