प्रयागराज, जेएनएन। परिणय सूत्र में बंधने के लिए अग्नि के सात फेरे लेने की वैदिक परंपरा में शनिवार को एक नया मुकाम दिखेगा। प्रयागराज के अरैल घाट पर 80 जोड़े श्रीराम चरित मानस को साक्षी मानकर व्यास पीठ के सात फेरे लेंगे। इसमें ङ्क्षहदू धर्म को मानने वाले अधिकांश परिवारों के बेटे-बेटियों की शादी होगी तो गुजरात से दो जोड़े भी इसमें शामिल होंगे जो जैन धर्म के मानने वाले हैं। ऐसा पहली बार होगा कि सामूहिक विवाह का एक धार्मिक टीवी चैनल पर 172 देशों में सीधा प्रसारण होगा।

संत कृपा सनातन संस्थान नाथ कर रहा आयोजन

सामूहिक विवाह का आयोजन संत कृपा सनातन संस्थान नाथ द्वारा राजस्थान की ओर से किया जा रहा है। संस्थान के प्रमुख मदन पालीवॉल की बेटी की पिछले दिनों व्यास पीठ के सात फेरे लेकर हुई शादी के दौरान कथा वाचक मोरारी बापू ने अन्य लोगों से भी ऐसे ही विवाह बंधन में बंधने का आह्वान किया था। इसके लिए शनिवार का दिन निश्चित किया गया है। इसके लिए तेजी से पंजीकरण भी होने लगे। शुक्रवार तक कुल 80 जोड़ों की शादी के लिए पंजीकरण हो चुका था। इसमें अधिकांश तो स्थानीय गरीब परिवार के लोग हैं। गुजरात से कल्पेश भाई और निधि प्रजापति, दिव्येश बाबूलाल पटेल व जीनल बेन का पंजीकरण सामूहिक विवाह के लिए हुआ है। जबकि अन्य लोग स्थानीय अनुसूचित जाति के, पिछड़े, नाविकों के बेटे-बेटियां हैं।

शादी वाले घरों में मेंहदी की रस्म हुई

इन सभी के लिए भोजन, कपड़े, उपहार, फल फूल व शादी में लगने वाली अन्य सामग्री की व्यवस्था संत कृपा सनातन संस्थान ने की है। सामूहिक विवाह में शादी करने को लेकर परिवारों में उत्साह देखा गया। शुक्रवार को घरों में मेंहदी की रस्म हुई। दूल्हा-दुल्हन के परिजन तैयारियों में जुटे रहे। घरों में मंगल गीत गाए गए। रिश्तेदारों को भी शादी में आने का निमंत्रण दिया गया।

बापू ने दलित श्रोता से भोजन लेकर आने को कहा

श्री रामकथा के दौरान मोरारी बापू ने एक दलित श्रोता से कहा कि वह अपने घर से भोजन बनाकर लाए। वह उसे खाएंगे। यह मांग बापू ने दलित श्रोता की चिट्ठी पढ़ते हुए की। बापू ने कहा कि चिट्ठी में अनुसूचित जाति के श्रोता ने लिखा है कि बापू उसके घर भी भिक्षा लेने के लिए आएं। मोरारी बापू ने उस श्रोता को अपने घर से भोजन बनाकर परिवार सहित पंडाल में आने का न्योता दिया। बापू ने कहा कि जो दूसरे को हल्का समझे, उसके जैसा कोई दूसरा हल्का नहीं हो सकता। बापू ने कहा कि व्यक्ति को किसी के साथ भी भेदभाव नहीं करना चाहिए।

बांसुरी संग संगीत की जुगलबंदी

अरैल घाट पर चल रही राम कथा के बाद सांस्कृतिक कार्यक्रम में बांसुरी वादक बलजिंदर सिंह बल्लू और उनकी टीम ने ऐसे सुर छेड़े कि श्रोता रसधारा में गोते लगाते रहे।

Posted By: Brijesh Srivastava

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