प्रयागराज, जेएनएन। खाड़ी देश में नौकरी करने गए एक युवक की हृदयगति रुक जाने से मौत हो गई थी। काफी प्रयास करने पर 40 दिन बाद शव को सऊदी अरब से भारत ले जाने की मंजूरी मिल सकी। लखनऊ लाने के बाद गुरुवार की शाम वहां से राममिलन का शव कौशांबी में घर लाया गया तो पत्नी समेत परिवार की महिलाएं विलाप करने लगीं। घंटे भर तक चीख-पुकार मची रही।  मां व पत्नी तो रोते-रोते बेसुध हो गईं। गांव के लोग भी बेहद दुखी हैं कि बेचारा गया था नौकरी के लिए लेकिन वहां जान चली गई।

परिवार की गरीबी दूर करने गया था परदेश

कौशांबी जनपद में करारी के अमुरा गांव निवासी इंद्रजीत की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है। परिवार की हालत में सुधार के इरादे से उसका 35 वर्षीय बेटा राममिलन नौकरी करने के लिए 27 फरवरी 2022 को सऊदी अरब के दम्माम शहर गया था। उसे वहां एक मदरसे में सफाईकर्मी के रूप में नौकरी मिल गई। बताते हैं कि वह लगभग 40 दिन पहले काफी परेशान था। वह अपनी मां नथिया देवी से फोन पर बात करने लगा।

मां से फोन पर बात करते गिर गया था राममिलन

राममिलन ने फोन पर बताया था कि उसके सीने में दर्द है और उसके शरीर से पसीना बह रहा है। अचानक उसका फोन कट गया, फिर काफी देर बाद राममिलन के कफील (मकान मालिक) का फोन आया कि हार्ट अटैक से उसकी मौत हो गई है। पूरा परिवार परेशान हो उठा। शव पाने के लिए अफसरों से लेकर जनप्रतिनिधियों का दरवाजा खटखटाया।

मृतक राममिलन के भाई ने बताया कि उसके भाई का शव 40 दिन तक काफी कोशिश करने के बाद अब सऊदी के दम्माम शहर से भेजा गया है। परिवार के लोग शव लाने के लिए बुधवार रात में लखनऊ पहुंच गए हैं। गुरुवार सुबह परिवार ने फोन पर लखनऊ से बताया कि कुछ औपचारिकता पूरी करने के बाद दोपहर में वे लखनऊ से रवाना होंगे। शाम तक राममिलन का शव लेकर वे कौशांबी में अपने गांव पहुंच जाएंगे।

सांसद के निर्देश पर भाजपा नेता ने शव घर लाने में की मदद  

राममिलन की लाश 40 दिन के बाद बड़े अथक प्रयास के बाद कौशांबी के सांसद विनोद सोनकर के निर्देश पर लखनऊ एयरपोर्ट लाया गया। फिर सांसद के आदेश पर भाजपा नेता नाजिया सिद्दीकी लखनऊ एयरपोर्ट पहुंची वहां से राममिलन का शव कौशांबी में उसके गांव तक पहुंचाया। शव गांव पहुंचने पर पत्नी समेत परिवार की महिलाएं रोने-चीखने लगीं। सैकड़ों लोग वहां एकत्र थे जिनकी आंखों में आंसू छलक आए।


कैसे होगी दो बेटियों की शादी, परिवार का गुजारा भी मुश्किल

राममिलन की शादी 5 वर्ष पूर्व हुई थी। उसकी दो बेटियां हैं संध्या तीन वर्ष और संजना एक वर्ष। इनका पालन पोषण अब कैसे होगा या एक परिवार में चिंता का विषय है।

इंतजार था राममिलन का लेकिन लाया गया है उसका शव वो भी 40 दिन। उसकी मां और मृतक की पत्नी राजवंती का रो-रोकर बुरा हाल है। वहीं, तीन वर्षीय बेटी संध्या और एक साल की बेटी संजना घटना से अनभिज्ञ है। पिता को इस बात का गम है कि आर्थिक स्थिति तो नहीं सुधरी लेकिन हादसा हो गया। एक बार भी वह पैसा नहीं भेज सका था। एक तो परिवार की हालत नहीं सुधरी ऊपर से बेटा भी दुनिया से चला गया।

Edited By: Ankur Tripathi

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