प्रयागराज, जेएनएन। इलाहाबाद विश्वविद्यालय के प्रोफेसर, विदेशी जमाती समेत 30 बंदियों को नैनी के सेंट्रल जेल में शिफ्ट कर दिया गया है। कोरोना वायरस के कारण सभी को गौहनिया के ग्रीन फील्ड एकेडमी स्कूल को अस्थायी जेल बनाकर रखा गया था। करीब 35 दिनों बाद जिलाधिकारी के निर्देश पर बंदियों को नैनी जेल भेजा गया। वहां उन्हें दूसरे कैदियों की तरह ही रखा गया है। विदेशी अधिनियम का उल्लंघन करने, महामारी एक्ट के मुकदमे में सभी को 21 अप्रैल को जेल भेजा गया था। जेल में बंदियों को कोरोना वायरस फैलने की आशंका को देखते हुए इन बंदियों को अस्थायी जेल में शिफ्ट किया गया था। फिलहाल स्कूल के प्रबंध निदेशक अरविंद पांडेय ने बताया कि बंदियों को भेजे जाने के बाद शनिवार को स्कूल में सैनिटाइजेशन कराया गया है।

जेल में पूर्व ब्लॉक प्रमुख, बेटा और इनामी क्वारंटाइन

 केंद्रीय कारागार नैनी में बंद पूर्व ब्लॉक प्रमुख दिलीप मिश्रा, उनके बेटे शुभम और एक लाख के इनामी नीरज सिंह को क्वारंटाइन कर दिया गया है। तीनों को अस्थायी जेल में रखा गया है। वरिष्ठ जेल अधीक्षक एचबी सिंह ने बताया कि कोरोना वायरस के संक्रमण से बचाव के लिए तीनों बंदियों को 14 दिन के लिए क्वारंटाइन किया गया है। नए बंदी को सीधे मुख्य जेल में नहीं रखा जा रहा है।

बीमारी से मासूम बच्ची की मौत, हत्या का आरोप

 सोरांव थाना क्षेत्र के विकास का पूरा गांव निवासी राकेश की मासूम बेटी अनामिका की शुक्रवार रात मौत हो गई। परिजनों ने थाने पहुंचकर पट्टीदारों पर हत्या का आरोप लगाया तो खलबली मच गई। विकास मजदूरी करता है। शुक्रवार रात वह अपनी दो माह की बेटी को लेकर सो रहा था। शनिवार सुबह वह उठकर कहीं चला गया और बेटी सोती रही। कुछ देर बाद देखा तो बच्ची की मौत हो गई थी। इससे परिवार में मातम छा गया। राकेश के पिता राजकुमार समेत अन्य ने पट्टीदारों पर हत्या का आरोप लगाते हुए थाने पहुंच गए। इंस्पेक्टर सोरांव रामचरण वर्मा का कहना है कि राजकुमार शराब के नशे में अपने भाई व अन्य लोगों से झगड़ा किया था। उसी के चलते उसने हत्या का आरोप लगाया था। हालांकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बीमारी से मौत की पुष्टि हुई है।

Posted By: Brijesh Srivastava

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