प्रयागराज, जागरण संवाददाता। आज यानी 20 जुलाई को विश्‍व शतरंज दिवस है। ऐसे में प्रयागराज के इस परिवार की चर्चा करना जरूरी है। यह परिवार पिछली तीन पीढि़यों से शह और मात का खेल शतरंज की बिसात पर खेल रहा है। इतना ही नहीं, राज्य स्तर पर ख्याति भी प्राप्त की है। कई प्रतियोगिताओं में शीर्ष स्थान भी हासिल किया। अब तीसरी पीढ़ी भी इसी परंपरा और मुकाम को बरकरार रखना चाहती है। तो आइए हम जानते हैं कि ये खिलाड़ी परिवार कौन है और क्‍या हैं उनकी उपलब्धियां।

उम्र सात वर्ष लेकिन प्रतिभा बड़ों जैसी

प्रयागराज शहर में करेली के गौसनगर निवासी 11 वर्षीय हसनैन सिद्दीकी ने महज सात साल की उम्र में ही दिमाग का खेल कहे जाने वाले शतरंज को खेलना शुरू कर दिया था। उन्होंने कई स्पर्धा भी जीता। कोरोना संक्रमण काल में आनलाइन प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेकर मुकाम भी हासिल किया। पहली बार वर्ष 2016 में अंडर-7 में स्टेट स्तर पर चैंपियन हुए। इसी वर्ष पांडीचेरी में नेशनल खेल में प्रतिभाग किया लेकिन निराशा हाथ लगी। वर्तमान में आल इंडिया पोस्ट एंड टेलीग्राफ के चैंपिंयन व कोच प्रदीप पाठक हसनैन को तालीम दे रहे हैं।

हसनैन को विरासत में मिली है प्रतिभा

हसनैन को शतरंज खेलने की प्रतिभा विरासत में मिली है। उनके पिता मो. उस्मान और दादा मो. हसान भी राज्य स्तर पर शतरंज खेल के बादशाह रह चुके हैं। उन्हीं की प्रेरणा से हसनैन भी शतरंज के खेल में उपलब्धियां हासिल कर रहे हैं। सेंट जोसफ के सातवीं कक्षा के छात्र हसनैन ने इलाहाबाद डिस्ट्रिक्ट चेस चैंपियनशिप की आनलाइन प्रतियोगिता में अंडर-19 में प्रथम स्थान हासिल किया है।

हसनैन के पिता और दादा भी शतरंज के बादशाह

हसनैन के दादा मो. हसान सिद्दीकी ने स्टेट में खेलकर नेशनल बी में गोल्ड प्राइज विनर रहे। इसके बाद कालीकट में नेशनल टीम चैंपियन रहे। हसनैन के पिता मो. उस्मान सिद्दीकी ने बताया कि वह वर्ष 1991 में अंडर-19 में तीसरे स्थान पर रहे। इसके बाद वर्ष 1992 में स्टेट चैंपियनशिप के विजेता रहे। उन्होंने वेस्ट बंगाल व केरल में भी प्रतिभाग कर प्रतियोगिता जीती। वर्ष 1989 से 1995 तक इलाहाबाद विश्‍वविद्यालय की ओर से छह साल तक आल इंडिया इंटर यूनिवर्सिटी खेला और कप्तानी भी की। वर्तमान मेें बाल विकास पुष्टाहार विभाग में धनूपुर में प्रधान सहायक पद पर तैनात हैं। उत्तर प्रदेश सिविल सर्विसेज की टीम की ओर से 10 बार खेल चुके हैं।

Edited By: Brijesh Srivastava