प्रयागराज, जेएनएन। प्राथमिक विद्यालय में बतौर प्रधानाचार्य पद पर शिक्षा की अलख जगाते रहे। रिटायर होने के बाद भी मन में बच्चों को पढ़ाने की इच्छा बनी रही तो गांव में ही इंटर कॉलेज की स्थापना कर दी। अब संरक्षक के तौर पर 11 माह कॉलेज की देखभाल करते हैं और एक माह घर परिवार की खुशहाली के लिए मन्नतों की झोली लेकर संगम तट आते हैं अनंतराम दुबे।

12 साल से कर रहे हैं कल्पवास

कौशांबी के म्योहर निवासी अनंतराम दुबे पत्नी अनारकली के साथ पिछले 12 साल से कल्पवास कर रहे हैं। अनंतराम बताते हैं कि रिटायर होने के बाद भी बच्चों को पढ़ाने की मन में इच्छा बनी रही। इसलिए 2001 में गांव में ही मां भगवती देवी इंटर कॉलेज की स्थापना की। शुरू में गांव के ही बच्चों को पढ़ाना शुरू किया। आज गांव के आसपास के करीब 12 सौ बच्चे कॉलेज में पढऩे आते हैं। सालभर कॉलेज और बच्चों की देखरेख करते हैं और एक माह मां गंगा के किनारे कल्पवास करने आ जाते हैं।

सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ उठाते रहे हैं आवाज

अनंतराम दुबे बताते हैं कि सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ शुरू से ही आवाज उठाते रहे हैं। उन्होंने बताया कि गांव में छोटी उम्र में ही छात्र-छात्राओं की शादी कर दी जाती थी। इसके खिलाफ मुहिम छेड़ी। अब मुहिम रंग दिखा रही है। बाल विवाह को लेकर अभिभावक भी जागरूक हुए हैं। 

खेलकूद और सांस्कृतिक कार्यक्रमों पर रहता है ज्यादा जोर

वह बताते हैं कि बच्चों को पढ़ाई के साथ खेलकूद और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के प्रति भी रुचि बढ़ानी चाहिए। खेलकूद से जहां बच्चों में शारीरिक विकास होता है, वहीं सांस्कृतिक कार्यक्रमों से बच्चों में बौद्धिक और मानसिक विकास होता है। इसीलिए कॉलेज में महत्वपूर्ण पर्वों पर ऐसे कार्यक्रम आयोजित करते रहते हैं। 

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