प्रयागराज, जेएनएन। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनटीजी) की सख्ती के बावजूद जिले में अवैध खनन पर रोकथाम नहीं लग पा रहा है। खनन विभाग के अधिकारियों और पुलिस विभाग की उदासीनता से यमुनापार में बारा क्षेत्र के परवेजाबाद और छीड़ी की पहाडिय़ों में बड़े पैमाने पर अवैध खनन हो रहा है। आधा दर्जन क्रशर प्लांट बिना एनओसी के चल रहे हैं। मनमाने तरीके से पहाड़ों को तोड़ा जा रहा है। ओवरलोड ट्रक सड़कों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। प्रतिदिन सरकार को लाखों रुपये का चूना लग रहा है। मगर अधिकारी अनजान बनकर बैठे हुए हैं।

यमुनापार के बारा क्षेत्र का अधिकांश भूभाग पहाड़ी है। यहां पर सिलिका सैंड सहित गिट्टी-पत्थर का कारोबार होता है। क्षेत्र के परवेजाबाद, छीड़ी, छतहरा, असवा की पहाडिय़ों पर भारी पैमाने पर खनन माफिया अवैध कारोबार करने में लगे हुए हैं। छीड़ी पहाड़ पर मात्र एक गिट्टी पत्थर का खनन पट्टा स्वीकृत है, जो सपा सरकार में हुआ था। अवैध खनन को लेकर सपा सरकार की किरकिरी हुई थी। तत्कालीन खनन मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति और कई अधिकारियों की जांच भी चल रही है।

खनन माफिया बिना परमिट रवन्ना के आसानी से निकल जाते हैं

कहा जा रहा है कि यहां पर सपा सरकार में जो पट्टा हुआ था, वह भी तत्कालीन खनन मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति की कृपा से मिला था। इसी एक मात्र खनन पट्टेधारक के नाम पर आधा दर्जन क्रशर प्लांट संचालित किए जा रहे हैं। इसके लिए न तो प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, न ही जल निगम, न ही वायु प्रदूषण, वन विभाग से एनओसी ली गई है। यहां से रोजाना सैकड़ों ट्रक गिट्टी लेकर जाते हैं। खनन माफिया बिना परमिट रवन्ना के घूरपुर मार्ग की तरफ से आसानी से निकल जाते हैैं।

इन इलाकों में हो रहा बेखौफ कारोबार

बारा, लालापुर और घूरपुर थाने से साठगांठ करके आसानी से पूरा कारोबार चल रहा है। सिलिका सैंड भी इस तरीके से निकाला जा रहा है। क्रशर प्लांट के संचालन से पर्यावरण को हो रहे नुकसान को लेकर एनजीटी गंभीर है। एनजीटी की सख्ती के बावजूद अवैध कारोबार चल रहा है। लाखों के अवैध कारोबार पर पर्दा डालने के लिए कभी-कभार दो-तीन ट्रकों को पकड़ लिया जाता है। कार्रवाई करने के मामले में खनन विभाग और जिला प्रशासन एक-दूसरे के पाले में गेंद डाल देता है।

बारा के एसडीएम ने यह कहा

बारा के एसडीएम सुभाष चंद्र यादव कहते हैं कि बारा क्षेत्र में चल रहे क्रशर प्लांट बिना एनओसी चल रहे हैं, इसकी जानकारी नहीं है। तहसील प्रशासन स्तर से जो भी कार्रवाई होनी चाहिए, उसके किया जाता है। इसमें मुख्य भूमिका खनन विभाग और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रहती है।

 

kumbh-mela-2021

शॉर्ट मे जानें सभी बड़ी खबरें और पायें ई-पेपर,ऑडियो न्यूज़,और अन्य सर्विस, डाउनलोड जागरण ऐप