जासं, इलाहाबाद : गंगा पर बने कर्जन पुल को नीलाम किए जाने का विरोध शुरू हो गया है। पुल निर्माण के बेजोड़ नमूने को दर्शाते कर्जन ब्रिज को एक धरोहर के रूप में संरक्षित रखने की मांग उठने लगी है। यह भी सुझाव दिया जा रहा है कि इसे पर्यटक स्थल के रूप में भी विकसित करके उसके मेंटीनेंस का खर्च भी निकाला जा सकता है। किसी भी सूरत में शहर के लोग इसे टूटने नहीं देना चाहते हैं। इसे संरक्षित करने के लिए पूर्व पार्षद ने कमिश्नर को पत्र भी सौंपा है।

अवध से इलाहाबाद को रेलमार्ग और सड़क मार्ग से जोड़ने के लिए अंग्रेजों के जमाने में फाफामऊ में गंगा पर पुल बनाया गया। उत्तर रेलवे अब इस पुल को नीलाम करने की योजना बना रहा है। रेलवे अफसरों ने इसकी प्रक्रिया शुरु कर दी है लेकिन अंतिम फैसला नहीं हुआ है। फिलहाल शहरवासी इस फैसले के खिलाफ है। इलाहाबाद म्यूजियम के निदेशक राजेश पुरोहित ने कहा कि कर्जन पुल देश की धरोहर है। इसे तोड़े नहीं, संरक्षित किया जाय। देश के अलग-अलग शहरों में बनी सौ साल पुरानी इमारतों को धरोहर के रूप में संरक्षित किया जा है। उनसे से तो यह बेहतर ही है। इसको गिराना अच्छा नहीं होगा। धरोहर को संजोने में सक्रिय आर्कियोलाजिस्ट प्रज्ञा मेहरोत्रा ने कहा कि पुल को किसी भी हाल में न तोड़ा जाय। इलाहाबाद में कोई उद्योग नहीं है। पुल, स्मारक, नदी आदि पर्यटक स्थल हैं। इसे पर्यटन के लिहाज से बेहतर विकसित करके कमाई भी की जा सकती है। उसी से पुल के संरक्षण का खर्च भी निकल आएगा। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के क्षेत्रीय निदेशक एसी त्रिपाठी ने बताया कि कर्जन पुल पुरातत्व के अधीन तो नहीं है लेकिन इसे धरोहर की लिस्ट में शामिल किया जा सकता है। इसको गिराना उचित नहीं होगा। भले ही रेल और सड़क यातायात इस पर बंद हुआ है लेकिन इसे धरोहर में शामिल करके पर्यटनस्थल के रूप में विकसित किया जा सकता है। वहीं पूर्व पार्षद कमलेश सिंह ने पुल नीलाम करने के खिलाफ कमिश्नर को पत्र सौंपा है। उन्होंने कहा है कि एक सदी पुराना यह पुल संगम नगरी की पहचान है। इसलिए इसका नामोनिशान खत्म न किया जाय।

Posted By: Jagran