जासं, इलाहाबाद : बिना सरकारी मशीनरी का सहयोग लिए पंजाब में 160 किलोमीटर लंबी पवित्र काली बेई नदी को पुनर्जीवन देने वाले पद्मश्री संत बलबीर सिंह सींचेवाल अब गंगा रक्षा की राह दिखाएंगे। वे आठ फरवरी को संगम नोज पर एक कार्यक्रम में शामिल होंगे। जहां वे संतों, संगठनों और प्रधानों से रूबरू होंगे।

पंजाब के संत बलबीर सिंह सींचेवाल को हाल में ही केंद्र सरकार ने पद्मश्री के अवार्ड से नवाजा है। उन्होंने काली बेई नदी जो लगभग सूख गई थी। उसे पुनर्जीवन दे दिया, इसके लिए उन्होंने सरकारी मशीनरी का इस्तेमाल भी नहीं किया। सिर्फ समाज के सहयोग से यह काम किया। इसलिए राष्ट्रीय नदी गंगा बेसिन प्राधिकरण (एनआरजीबीए) उन्हें गंगा रक्षा के लिए रोल मॉडल की तरह पेश करना चाहता है। 18 जनवरी को प्राधिकरण में सलाहकार का पद धारण करने वाले पूर्व पुलिस अधिकारी एनके सिंह इसके लिए विशेष प्रयास कर रहे हैं।

एनआरजीबीए के सलाहकार एनके सिंह बताते हैं कि माघ मेले में सींचेवाल का भव्य स्वागत किया जाएगा। इस दौरान वे काली बेई के लिए किए गए अपने कार्य का प्रजेंटेशन भी देंगे। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता न्यायमूर्ति गिरिधर मालवीय करेंगे। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में धर्माचार्य, गंगा किनारे के गांवों वाले ग्राम प्रधान और सामाजिक संगठन शामिल होंगे। एनके सिंह कहते हैं कि जिस तरह बिना सरकारी सहयोग के काली बेई नदी को पुनर्जीवन मिला है। उसी तरह धर्माचार्य चाह लेंगे तो गंगा की स्वच्छता की राह भी आसान हो जाएगी।

काली बेई पंजाब की गंगा

इलाहाबाद : ¨हदू धर्म में जितनी पवित्र नदी गंगा मानी जाती है उसी तरह पंजाब में काली बेई नदी का महत्व है। माना जाता है कि इसी नदी के जल में गुरु नानकदेव ने जल समाधि लगाई थी और उन्हें ज्ञान प्राप्त हुआ था।