जासं, इलाहाबाद : प्रशासन ने भले ही एक जनवरी से गंगा-यमुना में समाहित होने से पहले नाले के गंदे पानी के ट्रीटमेंट का दावा किया था, लेकिन अभी तक इसका असर दिख नहीं रहा है। अभी भी गंगा में सलोरी नाले का गंदा पानी सीधे मिल रहा है जो श्रद्धालुओं और संतों के लिए चिंता का विषय है।

12 जनवरी को माघ मेले का पहला स्नान है, लेकिन स्नान पर्व के लिए जो सबसे अहम जरूरत स्वच्छ पानी की है वही पूरी होती नजर नहीं आ रही है। सलोरी से आने वाले नाले का गंदा बदबूदार पानी जब गंगा में जाने का मुद्दा दैनिक जागरण ने उठाया था तो जिलाधिकारी और मंडलायुक्त ने तत्काल इस पर रोक लगाने के आदेश दिए थे। इसके बावजूद अभी तक यह प्रवाह जारी है। जिससे गंगा का जल संगम तक मैला हो रहा है। इसी तरह शहर के अन्य कई नालों का पानी भी गंगा में आ रहा है। जिलाधिकारी संजय कुमार ने बताया कि एक जनवरी से सभी नालों का बायोलॉजिकल ट्रीटमेंट शुरू कर दिया गया है। जिसका नतीजा आठ से नौ जनवरी तक सामने आ जाएगा और स्नान तक साफ पानी मिलने लगेगा।

पीसीबी और इकाई अफसरों की लगी क्लास

इलाहाबाद : गुरुवार शाम को संगम पहुंचे आयुक्त राजन शुक्ला और जिलाधिकारी संजय कुमार ने नालों के गंदे पानी को लेकर गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड अधिकारियों की जमकर क्लास लगाई। उन्होंने कहा कि दोनों विभाग मिलकर गंगा में गंदे पानी पर रोक लगाएं। दोनों विभाग आपस में समन्वय बनाकर काम करें, जिसका निरीक्षण मजिस्ट्रेट नियमित रूप से करेंगे।

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