जासं, इलाहाबाद : इलाहाबाद विश्वविद्यालय के सेंटर फॉर वूमेन स्टडीज द्वारा महिला छात्रावास में कानूनी साक्षरता विषय पर कार्यशाला का आयोजन किया गया। मुख्य अतिथि न्यायमूर्ति विजयलक्ष्मी ने वैधानिक शक्तियों के जरिए छात्राओं को शोषण के खिलाफ लड़ाई के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि कानून में महिला और पुरुष दोनों को समान अधिकार दिए गए हैं। ऐसे में कानून की सही जानकारी प्राप्त करके महिलाएं अपने उत्पीड़न के खिलाफ आवाज उठा सकती हैं।

मुख्यवक्ता सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता अरविन्द जैन ने विवाह, तलाक व प्रापर्टी में महिलाओं के अधिकार की जानकारी दी। उन्होंने 2013 के निर्भया केस का उदाहरण देते हुए छात्राओं का आत्मविश्वास बढ़ाया। उन्होंने महिलाओं द्वारा आवाज न उठाए जाने की मनोदशा को रेखांकित करते हुए कहा कि इसके बिना कानून प्रणाली में बदलाव आना संभव नहीं है। उन्होंने महिलाओं के लिए राजनीतिक शक्ति को जरूरी बताया। सेंटर की निदेशक प्रो. सुमिता परमार ने कार्यशाला में शामिल छात्राओं को उनके अधिकारों की जानकारी दी। स्वागत डॉ. रूचिका वर्मा ने किया। रिचा सिंह, बालकृष्ण, फरहान अख्तर, सुधीर गुप्त मौजूद थे।