जागरण संवाददाता, इलाहाबाद : राम कक्षा मानव का चरित्र निर्माण करती है। हमें अपने जीवनकाल में एक बेटा बनकर , एक भाई बनकर , एक पिता बनकर , एक पति बनकर किस तरह से जीवन यापन करना चाहिए यह शिक्षा हमें प्रभु श्री राम का चरित्र पढ़ने से मिलती है। जब कोई भी जीव ऐसे मर्यादित व्यक्तित्व के विषय में अध्ययन करता है तो स्वयं ही चरित्रवान बन जाता है। उक्त विचार देवकीनंदन ठाकुर जी के हैं। वे शुक्रवार को अखिल भारतीय सरदार पटेल संस्थान अलोपीबाग में आयोजित विशाल श्री राम कथा में भक्तों से मुखातिब थे। कथा क्रम को आगे बढ़ाते हुए महाराज ने कहा की रामायण में मुख्यत: दो पात्र हैं। प्रभु श्री राम और रावण। एक नायक है और एक खलनायक। इसी तरह मानव जीव में भी दो पात्र होते हैं नायक और खलनायक। जिस मानव जीव के जीवन में प्रभु श्री राम की भक्ति होती है, वह नायक होता है और जिस के जीवन में प्रभु की भक्ति खत्म हो जाती है वह खलनायक होता है। आज के कथा प्रसंग में श्री राम जन्मोत्सव बड़ी धूमधाम से मनाया गया। कथा के दौरान भोला सिंह , कुलदीप सिंह , अन्तरिक्ष शुक्ला , राजित यादव , कृष्ण कुमार दुबे उपस्थित रहे ।