अलीगढ़, जेएनएन। सरकारी महकमा हो तो अक्सर देखने में आता है कि व्यवस्थाएं दुरुस्त बनाकर उनका क्रियान्वयन कराया जाता है। मगर इस बार व्यवस्थाएं ऐसी बना दी गईं जिनका खामियाजा विद्यार्थियों व उनके अभिभावकों के साथ शिक्षकों को भुगतना पड़ रहा है। क्याेंकि बात उनके भविष्य व करियर की है इसलिए विद्यार्थी परेशानी के साथ-साथ टेंशन भी झेल रहे हैं। अब इन समस्याओं से निजात दिलाने के लिए अफसरों की ओर से समिति तक बनाई जा रही है। हेल्प डेस्क पहले ही बनाकर उसका नंबर जारी किया जा चुका है। बहरहाल कोरोना काल के चलते विद्यार्थियों, अभिभावकों व शिक्षकों को पहले भी काफी समस्याएं रहीं और अभी भी उनको निजात नहीं मिली है।

स्‍टूडेंट की बढ़ी टेंशन

यूपी बोर्ड ने 31 जुलाई को हाईस्कूल व इंटरमीडिएट का परीक्षा परिणाम जारी किया था। परिणाम भी ऐसे जारी किया कि कोई भी पूरी तरह से अपना परिणाम नहीं देख पाया। जिला टापर की जानकारी तो तमाम जिलों के अफसरों तक को नहीं लग पाई। एक-दो दिन बाद विद्यालयों से परिणाम देखा तो विद्यार्थियों की टेंशन बढ़ गई। किसी विद्यार्थी का परिणाम आशा से काफी कमजोर रहा तो तमाम विद्यार्थियों का परिणाम स्पष्ट नहीं हो रहा। समस्या इतनी ज्यादा रही कि यूपी बोर्ड के क्षेत्रीय कार्यालय मेरठ में हेल्पडेस्क तक बनानी पड़ गई। यहां विद्यार्थी, अभिभावक व प्रधानाचार्य चक्कर काट-काटकर आपत्तियां दर्ज करा रहे हैं। अब जिले में अफसरों की ओर से तीन प्रधानाचार्यों की समिति को गठित किया गया है। इसमें राजकीय कन्या इंटर कालेज दौरऊमोड़ (9412371130), राजकीय हाईस्कूल गंगीरी (9997965768) के प्रधानाचार्यों और नौरंगीलाल राजकीय इंटर कालेज के सहायक अध्यापक मुनेश कुमार (9719355905) को शामिल किया गया है। इनके नंबरों पर विद्यार्थी व अभिभावक परीक्षा परिणाम संबंधी अपनी समस्या बता सकते हैं। उनकी समस्याओं या आपत्तियों को बोर्ड कार्यालय तक पहुंचाया जा सकेगा। इससे विद्यार्थियों व अभिभावकों को ज्यादा समस्या का सामना नहीं करना पड़ेगा।

डीआइओएस डा. धर्मेंद्र कुमार शर्मा ने कहा कि छात्र-छात्राओं की सहूलियत के लिए तीन सदस्यीय टीम गठित की गई है। इनसे संपर्क कर विद्यार्थी अपनी आपत्ति दर्ज करा सकते हैं। इनको सीधे बोर्ड के क्षेत्रीय कार्यालय भिजवा दिया जाएगा। परीक्षा परिणाम से संबंधित किसी भी संशय या समस्या का समाधान बोर्ड स्तर से ही किया जाएगा। स्थानीय स्तर से कोई समाधान नहीं किया जा सकता, इसलिए ये व्यवस्था की गई है।