अलीगढ़ (जेएनएन)। खाने में सूखी रोटियां...। पीने को गंदा पानी...। कुछ कहो तो मुंह पर चप्पलें मारी जाती हैं। जबरदस्ती नशे की दवाएं दी जा रही हैं...। हमें बचा लीजिए...। कहते-कहते नशा मुक्ति केंद्र में रह रहे शादाब शरीर पर चोट के निशान दिखाने लगे। बोले, विनोद को इन लोगों ने पीट-पीटकर मार डाला। पर, जिस नशा मुक्ति केंद्र में 55 युवक रह रहे थे, वहां की इंसानियत तो विनोद की मौत से पहले ही  'मरÓ चुकी थी।

मां से बात करना चाहता था विनोद

खैर रोड स्थित दयानिता नशा मुक्ति केंद्र में बदायूं से तीन माह पहले आए शादाब खां ने बताया, 23 अगस्त की शाम को विनोद मां से बात करना चाह रहा था। विनोद ने स्टाफ से कहा, 'मेरी मां कुछ दिनों में (एम्स) दिल्ली चली जाएंगी, उसे आंतों में कैंसर है, एक बार बात करवा दो। इस पर केंद्र के स्टाफ ने डंडों से उसे पीटा। बेहाल होकर वो जमीन पर पड़ा रहा। रात करीब दो बजे फिर उसने मां से मिलने की जिद की, तो सबमर्सिबल के पाइप से उसकी पिटाई की गई। पसलियों में डंडे मारे गए। फिर मुंह पर कपड़ा बांधकर चप्पलों से पीटा गया। उसके बाल पकड़कर सिर जमीन में दे मारा। विनोद अधमरा हो चुका था। सुबह नौ बजे तक पड़ा रहा। तब तक उसकी मौत हो चुकी थी।

गिरकर चोट लगने की कही थी बात

विनोद के चचेरे भाई मोहन चौधरी ने पुलिस को दी तहरीर में बताया कि 24 अगस्त की दोपहर नशा मुक्ति केंद्र के दो लोग गांव में आए थे, जिन्होंने कहा कि, विनोद बीमार है और जिला अस्पताल में भर्ती है। उन्हें यहां आकर विनोद की मौत के बारे में पता चला। केंद्र संचालक ने कहा, विनोद गिर गया था, जिसके बाद उसे अस्पताल लाया गया, जबकि उसके सिर पर गंभीर चोट के निशान थे।

सबमर्सिबल के पाइप व डंडों से की जाती थी मारपीट

नशा मुक्ति केंद्र में युवकों को टॉर्चर किया जा रहा था। टप्पल के ताहरपुर निवासी दिनेश चौधरी के तलबे व पैरों पर नीले निशान पड़े थे। सलमान निवासी जमालपुर के शरीर पर भी नीले निशान थे। सबमर्सिबल के पाइप व डंडों से रोजाना मारपीट की जाती थी। दवा के नाम पर नशे की गोली दी जाती थीं।

आंखों में आ गए आंसू

10 माह से रह रहे रविंद्र निवासी चिलकौरा चुपचाप बैठे थे। अन्य युवकों ने बताया कि मारपीट से रविंद्र की आवाज चली गई है। इतना सुनकर रविंद्र की आंखों में आंसू आ गए।

मानसिक संतुलन खोया

प्रवीन गुप्ता निवासी रामघाट रोड 10 साल से केंद्र में रह रहे हैं। मानसिक संतुलन पूरी तरह खो चुके हैं। संचालक इन्हें बेड मेंबर (कामकाज में असमर्थ) बनाकर अतिरिक्त पैसे ऐंठता था।

सूखी रोटियां, खराब सब्जी

केंद्र में खराब आटे की रोटियां बनवाई जा रही थीं। सब्जी में सड़े हुए आलू थे। पानी ऊपर ही तैर रहा था। दलिया के दूध में भी पानी ही नजर आ रहा था। युवकों को सूखी रोटी व खराब सब्जी खानी पड़ती थी।

परिवार को मिलाने से पहले सुधार देते थे हालात

जब कोई परिवार का सदस्य मिलने के लिए आता था, तो युवक को शेविंग कराकर साफ-सुथरा बना देते थे, ताकि परिवार को शक न हो।

वसूलते थे मोटी रकम

आर्थिक स्थिति देखकर युवकों से अलग-अलग मासिक फीस वसूली जा रही थी। आर्थिक स्थिति देखकर मोटा पैसा भी लिया जाता था। विनोद के भाई ने बताया कि उनसे 10 हजार रुपये लिए गए थे।

घर का सामान खुद करते थे इस्तेमाल

किसी के घर से रोजमर्रा का कोई सामान आता था, तो स्टाफ के लोग खुद इस्तेमाल करते थे, जबकि उन्हें कोई सुविधा नहीं दी जाती थी। एक साबुन से सभी लोग नहाते थे।

स्टाफ के कमरे में एसी, एलईडी

संचालक व स्टाफ ने अपने कमरे में एसी व एलईडी लगा रखी थी। इसमें किसी को घुसने की इजाजत नहीं थी। सब्जी, दाल व जरूरत का सामान इसी कमरे में रखा रहता था।

Posted By: Sandeep Saxena

अब खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस, डाउनलोड करें जागरण एप