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अलीगढ़ में सीक्रेट कोड की व्यवस्था दिला रही प्रदेश के पहलवानों को लाभ, अब आईडी से ही मिलेगी एंट्री

Published: Tue, 18 Aug 2026 04:17 AM (IST)

उत्तर प्रदेश में कुश्ती खेल में सीक्रेट कोड व्यवस्था लागू होने से प्रतिभावान पहलवानों को सीधा लाभ मिल रहा है ...और पढ़ें

सीक्रेट कोड की व्यवस्था दिला रही प्रदेश के पहलवानों को लाभ।

सीक्रेट कोड की व्यवस्था दिला रही प्रदेश के पहलवानों को लाभ।

HighLights

  1. कुश्ती में सीक्रेट कोड व्यवस्था प्रदेशभर में लागू।

  2. प्रतिभावान पहलवानों को सीधा लाभ, फर्जीवाड़ा रुका।

  3. जिला सचिव की आईडी से एंट्री, कोच अनिवार्य।

जागरण संवाददाता, अलीगढ़। कुश्ती खेल में अब सीक्रेट (गोपनीय) कोड की व्यवस्था प्रदेशभर में अनिवार्य रूप से लागू कर दी गई है। इससे प्रतिभावान पहलवान सीधे तौर पर लाभान्वित हो रहे हैं। फर्जीवाड़े पर भी लगाम लग गई है। यूपी रेसलिंग एसोसिएशन की ओर से पहलवानों के हित में ये व्यवस्था लागू की गई है।

अब जिला एसोसिएशन के सचिव की सीक्रेट आईडी व कोड से ही पहलवानों की एंट्री भेजी जा रही हैं। उसमें जिन पहलवानों के नाम होंगे वे ही प्रतियोगिता में खेलेंगे। अगर आयोजन स्थल पर कोई बड़े पदाधिकारी अपने चहेतों के नाम एंट्री कराने के लिए देंगे तो वो मान्य नहीं होंगे। कितनी भी बड़ी सिफारिश हो, वो काम नहीं आएगी।

अंडर-15 व अंडर-17 कुश्ती टूर्नामेंट के लिए इसी प्रक्रिया के तहत पिछले महीनों में खिलाड़ियों के नाम भेजे जा चुके हैं। अब अंडर-23 टूर्नामेंट के लिए भी ऐसे ही नाम भेजे जाएंगे।

पूर्व की व्यवस्था में जिला सचिव किसी स्पर्धा में अगर आठ पहलवानों की एंट्री भेजते थे, तो आयोजन स्थल पर संगठन में वर्चस्व रखने वाले लोग अपने दो-तीन चहेते पहलवानों की एंट्री डायरेक्ट दे देते थे। उनको खिलाने का दबाव बन जाता था। ऐसे में उन आठ में से दो-तीन खिलाड़ियों को रिप्लेस करना पड़ता था। ये वास्तविक प्रतिभा का हनन था। मगर अब सीक्रेट कोड व्यवस्था लागू हो गई है।

जिलास्तर पर एसोसिएशन के सचिव के कोड से जिनकी एंट्री भेजी जाएंगी, वही खिलाड़ी प्रतियोगिता में खेलेंगे। इसके अलावा टीम के साथ कोच का जाना भी अनिवार्य कर दिया गया है।

अगर कोच नहीं जाएंगे तो चयनित खिलाड़ी प्रतियोगिता में हिस्सा नहीं ले पाएंगे। ऐसा इसलिए किया गया है क्योंकि पहले सभी खिलाड़ी रिंग के बाहर शोर मचाते थे।

रिंग में खेल रहे पहलवान को अपना-अपना मार्गदर्शन देते थे। इससे खेल में व्यवधान पड़ता था व प्रदर्शन प्रभावित होता था। अब वहां केवल कोच की कुर्सी पड़ेगी और केवल वही अंदर बैठकर पहलवान को मार्गदर्शन देंगे।

ऐसे काम करती है व्यवस्था

जिला कुश्ती एसोसिएशन के सचिव भगत सिंह बाबा ने बताया कि अब उनको प्रदेशस्तर से ई-मेल भेजी जाती है। इसमें सीक्रेट कोड व आईडी दी जाती है। अंडर-23 टूर्नामेंट की आईडी आ गई है। उसमें पासवर्ड भी होता है। इस पासवर्ड से लाग-इन करने के बाद एंट्री फीस जमा करनी होती है। इस आईडी से प्रदेशस्तर पर खिलाड़ियों के नाम भेजे जाते हैं।

इस आईडी को यूपी एसोसिएशन के कोषाध्यक्ष ही खोल व देख सकते हैं। बाकी दूसरा कोई नहीं। अगर आठ पहलवानों की एंट्री भेजी गई है तो वो ही आठ खिलाड़ी प्रतियोगिता में खेलेंगे। कहा कि, फिर अगर वे स्वयं अपने बच्चे की भी एंट्री कराना चाहें तो नहीं हो सकती।

खिलाड़ियों के बोल

यह व्यवस्था खिलाड़ियों के हित में है। अब किसी पहलवान को स्पर्धा से ठीक पहले बिना कारण प्रतियोगिता से दूर करने पर नकेल लग गई है। ट्रायल में चयनित होने वाले खिलाड़ी ही खेल सकेंगे। -दिनेश चौधरी, पहलवान

 

अंडर-17 कुश्ती टूर्नामेंट में इसी नई व्यवस्था के तहत नाम भेजे गए थे। ट्रायल में चयन होने पर आगे चलकर प्रतियोगिता से नाम हटने का डर नहीं रहता है। वास्तविक प्रतिभाओं के लिए ये अच्छी व्यवस्था है। -साक्षी शर्मा, पहलवान

 

खेल व खिलाड़ियों के हित में जिला सचिव के कोड से एंट्री भेजने की व्यवस्था उत्तरप्रदेश में लागू कर दी गई है। इसका लाभ भी पहलवानों को मिल रहा है। टीम के साथ कोच का जाना भी अनिवार्य किया गया है। -सुरेश चंद्र उपाध्याय, महासचिव, यूपी रेसलिंग एसोसिएशन।