अलीगढ़ [जेएनएन]। न जाने ऐसी कौन सी मजबूरी रही कि एक मां अपने दिल पर पत्थर रखकर अपनी छह माह की दुधमुंही बच्ची को बरेली पैसेंजर ट्रेन के दिव्यांग कोच में सीट पर छोड़ गई। बच्ची के रोने पर यात्रियों को जानकारी हो सकी। तब  बच्ची जीआरपी थाने के सुपुर्द की गई। बूमैन प्रोटेक्शन सेल की मदद से बच्ची को चाइल्ड लाइन संस्था को सौंप दिया गया है।

तीन माह की है बच्ची

मंगलवार शाम बरेली पैसेंजर ट्रेन बरेली से अलीगढ़ आ रही थी। स्टेशन आने से पूर्व कुछ यात्रियों ने गार्ड कोच से पहले दिव्यांग कोच में एक बच्ची के रोने की आवाज सुनी।  कोच की सीट पर एक मासूम पड़ी थी। इसकी उम्र करीब तीन माह है। पास में ही दूध की बोतल व कपड़े भी पड़े हुए थे। ट्रेन अलीगढ़ स्टेशन पहुंचने पर बच्ची को जीआरपी थाने को सौंप दिया गया। इस बीच गांधीपार्क क्षेत्र के नौरंगाबाद स्थित महावीर नगर निवासी आशा कार्यकत्री मीनाक्षी सिंह के कुछ रिश्तेदार भी ट्रेन में सफर कर रहे थे। उनके जरिए मीनाक्षी सिंह को बच्ची के ट्रेन में लावारिस मिलने की जानकारी मिली।

वूमैन प्रोटेक्शन सेल से मदद मांगी

उन्होंने वूमैन प्रोटेक्शन सेल से मदद मांगी। फलस्वरूप सेल ने चाइल्ड लाइन की टीम को स्टेशन पर भेज दिया। बच्ची जीआरपी थाने के सुपुर्द की गई। बूमैन प्रोटेक्शन सेल की मदद से बच्ची को चाइल्ड लाइन संस्था को सौंप दिया गया है। जीआरपी के एसएसआई अब्दुल मोईज ने बताया कि बच्ची के माता-पिता के बारे में जानकारी की जा रही है।

Posted By: Sandeep Saxena

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