अलीगढ़, जेएनएन । कोरोना में तमाम लोगों के सामने आर्थिक रुप से समस्याएं खड़ी हो गईं, ऐसे भी लाेग थे, जिनके घर दो जून की रोटी तक नहीं थी। कई सामाजिक संगठनों ने उन्हें मदद किया। राशन से लेकर दवा आदि उपलब्ध कराई। ऐसी ही उड़ान सोसायटी है। सोसायटी के अध्यक्ष डा. ज्ञानेंद्र मिश्रा कहते हैं कि सेवा ही संकल्प है, जरूरतमंदों की मदद यदि हो जाती है तो इससे अच्छी और बात क्या होगी?

डेढ़ साल से जरूरतमंदों तक पहुंचा रहे राशन

उड़ान सोसाइटी के अंतर्गत संचालित चाइल्ड लाइन भी लंबे समय से काम कर रही है। पिछले साल कोराेना के समय 50 गरीब परिवारों को चिन्हित कर लिया था। हर महीने उनके घर पर राशन पहुंच जाता है। लगातार डेढ़ साल से राशन पहुंच रहा है। इस बार कोरोना की दूसरी लहर में भी उड़ान सोसायटी की ओर से जरूरतमंदों को राशन और दवा बांटी जा रही है। उड़ान सोसायटी के अध्यक्ष डा. ज्ञानेंद्र मिश्रा ने बताया कि चाइल्ड लाइन के नंबर तमाम जगहों पर दिए गए हैं। लोग बच्चों के बारे में तो जानकारी देते ही हैं कई बार मदद की भी गुहार लगाते हैं। अक्सर राशन और दवा आदि के लिए फोन आ जाया करते हैं। कई बार बच्चे भी फोन करते हैं कि घर में कुछ खाने-पीने को नहीं है, स्थिति बहुत खराब है, कुछ मदद कर दीजिए, फिर टीम को भेजकर परिवार के बारे में जानकारी ली जाती है। कई बार तो स्थिति वास्तव में भयावह रहती है। घर में खाने का एक भी दाना नहीं होता है, फिर तुरंत टीम आसपास की दुकानों से खाने-पीने के लिए बिस्कुट, नमकीन आदि चीजें लेकर आती है, जिससे फौरी तौर पर राहत मिल सके। इसके बाद टीम महीने भर का राशन लेकर पहुंचती है।

आर्थिक स्‍थिति खराब वाले घरों तक पहुंचाया जा रहा राशन 

महानगर में ऐसे 50 परिवारों को चुना गया है, जिनकी आर्थिक स्थिति वास्तव में बहुत खराब है, उन्हें प्रति महीने राशन पहुंचाया जा रहा है। इस बार कोरोना में निधिवन कालेानी के एक व्यक्ति के पांव में चोट आ गई थी, उसके पास इलाज के लिए कोई व्यवस्था नहीं थी। फिर संस्था की तरफ से तीन हजार रुपये भिजवाए गए, जिससे उसने प्लास्टर चढ़वाया और इलाज आदि में खर्च किया। डा. ज्ञानेंद्र मिश्रा ने बताया कि कई बार गरीब लड़कियों की शादी में मदद के लिए भी परिवार के लोग आ जाते हैं। बुजुर्ग माता-पिता होते हैं या फिर पिता कहीं मजदूरी आदि करते रहते हैं, ऐसे लोगों की भी मदद संस्था की ओर से किया जाता है। डा. ज्ञानेंद्र मिश्रा ने कहा कि पुराने समय में हमारे गांवों में व्यवस्था थी कि भोजन से पहले पड़ोसी के बारे में चिंता कर ली जाए, कहीं वो भूखा तो नहीं है, यदि वो भूखा है और स्वयं भोजन कर लिया सबसे बड़ा अपराध होता है। यदि ऐसी व्यवस्था फिर लौट आए तो देश में कोई भी भूखा नहीं रहेगा।

Edited By: Anil Kushwaha