अलीगढ़, जेएनएन। रविवार से नए सर्किल रेट लागू हो गए हैं। हालांकि, अवकाश होने के चलते सोमवार से निबंधन कार्यालयों में यह लागू हो गए हैं। लगातार चार साल बाद भी प्रशासन ने सर्किल रेट न बढ़ाने का फैसला लिया है। इसके पीछे अफसरों की दूरगामी सोच है। अफसर मानते हैं कि अगर सर्किल रेट बढ़ाते हैं तो फिर स्टांप चाेरी के मामले बढ़ जाते हैं। इससे राजस्व को तगड़ा झटका लगता है। 2017 से पहले सर्किल रेट बढ़ाने से ही स्टांप चोरी के मामले बढ़े थे। ऐसे में सर्किल रेट नहीं बढ़ेगे तो बैनामें अधिक होंगे। इससे स्टांप चोरी तो रुकेगी ही साथ ही राजस्व भी बढ़ेगा। कोरोना काल में अधिक से अधिक राजस्व एकत्रित करना वैसे भी सरकार की प्राथमिकता में शामिल है।

अलग अलग होते हैं सर्किल रेट

स्टांप एवं पंजीयन विभाग की ओर से जमीनों के आवासीय एवं व्यवसायिक के हिसाब से सर्किल रेट तय होते हैं। गांव व देहात क्षेत्र में अलग-अलग सर्किल रेट होते हैं। प्रशासन एक अगस्त को हर सल नए सर्किल रेट जारी करता है। इस सर्किल रेट के आधार पर जमीन खरीद के समय स्टांप शुल्क लगता है। जमीन की खरीद-फरोख्त भी इसी सर्किल रेट के आधार पर होती है। जिले में पिछले तीन साल से सर्किल रेट नहीं बढ़े हैं। हालांकि, हर साल क्षेत्र में जरूर बढ़ोत्तरी हो रही थी। पहले दो साल जहां जमीन कारोबार में मंदी के चलते सर्किल रेट नहीं बढ़े। वहीं, पिछले साल काेरोना के चलते कीमत नहीं बढ़ी है, लेकिन कोरोना का कहर इस बार भी खूब रहा। ऐसे में पहले से ही संभावना था कि इस साल भी सर्किल रेट नहीं बढ़ेगे। अब शनिवार को डीएम की ओर से इन संभावनाओं पर मुहर लगा दी गई। अब रविवार को भी वित्तीय वर्ष 2020-21 की कीमतों पर ही बैनामें होंगे। हालांकि, अवकाश के चलते सोमवार से ही यह नए आदेश लागू होंगे। एडीएम वित्त विधान जायसवाल ने बताया कि सर्किल रेट बढ़ने पर स्टांप चोरी के मामले बढ़ जाते हैं। इससे राजस्व को तगड़ा झटका लगता है। इसी के चलते प्रशासन इस बार भी सर्किल रेट न बढ़ाने का फैसला लिया है।

Edited By: Anil Kushwaha