संसू, अलीगढ़ : पश्चिम उत्तर प्रदेश की सबसे बड़ी हरदुआगंज तापीय परियोजना की दोनों यूनिटों को सोमवार की रात को अनिश्चितकाल के लिए थर्मल ब्रेकिग पर बंद करा दिया गया है। बेमौसम बरसात से अचानक मौसम में परिवर्तन आ गया है, जिससे प्रदेश में बिजली की मांग लगातार गिरती जा रही थी। इसको देखते हुए 250-250 मेगावाट की आठ और नौ नंबर यूनिट को अनिश्चितकाल के लिए बंद कर दिया गया है। लखनऊ मुख्यालय के आदेश पर प्रबंधन ने यह निर्णय लिया है।

हरदुआगंज तापीय परियोजना कोयले की कमी से उभर चुकी है। इसलिए पूरी क्षमता के साथ क्रमश: आठ औैर नौ नंबर यूनिट 500 मेगावाट का बिजली का उत्पादन कर रही थी। सोमवार की रात लखनऊ मुख्यालय के आदेश पर सिस्टम लोड डिस्पेच सेंटर (एसएलडीसी) के तहत इन दोनों यूनिटों को बंद करा दिया गया। इसके चलते अचानक परियोजना का बिजली उत्पादन शून्य हो गया। आठ नंबर एवं नौ नंबर यूनिट पूरी क्षमता से बिजली का उत्पादन कर रही थी। वहीं सात नंबर यूनिट 120 मेगावाट बिजली का उत्पादन करने की क्षमता रखती है। तकनीकी कमी के चलते 13 अगस्त से बंद पड़ी है। इस यूनिट को चलाने के लिए लखनऊ मुख्यालय से टेक्नीशियनों की टीम भी आ चुकी है, फिर भी इस यूनिट को चलाने में प्रबंधन कामयाब नहीं हो सका। हरदुआगंज तापीय परियोजना 620 मेगावाट बिजली का उत्पादन करने की क्षमता रखती है। इस परियोजना से पांच जिलों को बिजली आपूर्ति दी जाती है। फिलहाल प्रदेश में अचानक बिजली की मांग गिर जाने के चलते दोनों यूनिटों को बंद कर दिया गया है। परियोजना मुख्य महाप्रबंधक सुनील कुमार से बात करनी चाही तो उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया। इनका कहना है..

बिजली की डिमांड कम होने से आठ और नौ नंबर यूनिट बंद कर दी गई हैं। मौसम ठीक होने पर यदि डिमांड बढ़ती है तो फिर से चालू की जाएंगी। बहरहाल, कोयले की कोई कमी नहीं है।

सुनील कुमार सिंह, महाप्रबंधक, हरदुआगंज तापीय परियोजना

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