हाथरस, जागरण संवाददाता । Hathras Sadar MLA : महिला शक्ति को समर्पित रहे गुरुवार के मानसून सत्र में हाथरस सदर की विधायक अंजुला माहौर ने भी खुलकर अपनी बात रखी। अपने सात मिनट के उद्बोधन में विधायक ने न सिर्फ शेरो-शायरी से महिलाओं की ताकत को बताया बल्कि विपक्ष पर भी तंज किया। विधायक ने कहा कि देश के Prime Minister Narendra Modi और उत्तर प्रदेश के Chief Minister Yogi Adityanath महिलाओं की ताकत काे समझ गए, लेकिन विपक्षी दलों के नेताओं ने इसे नहीं समझा। संबोधन में उन्होंने सरकार की महिला कल्याण से जुड़ी योजनाओं का बखान भी किया।

मानसून सत्र ने बदला दुनिया का मानसून : अपने उद्बोधन की शुरुआत Anjula Mahour ने चार पंक्तियों से की। उन्होंने कहा कि 'हंसकर सह जाऊ कष्टों को, वो अंतर्शक्ति जगाने दो, मत करो भ्रूण हत्या मेरी, वो बंद कली खिल जाने दो, बस इनती बिनती है मां, दुनिया में मुझको आने दो, जीने का अधिकार मुझे दो, बस थोड़ा सा प्यार मुझे दो...'। इन पंक्तियों का सदन में तालियां बजाकर समर्थन किया। उन्होंने कहा कि आज के मानसून सत्र से पूरी दुनिया का मानसून बदला है।

वह बाेलीं कि प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री ने अपनी जीत के बाद कहा था कि महिलाओं के वृहद आशीर्वाद से दोबारा सरकार में लौटे हैं। उन्होंने अपनी पंक्तियाें 'मुर्दा लोहे को भी औजार बनाने वाले, अपने आंसू को भी हथियार बनाने वाले, हमको बेकार समझते हैं वह पुराने वाले सियासतजदां लोग, हम हैं इस मुल्क की सरकार बनाने वाले...' से विपक्ष पर तंच कसा। विधायक ने वर्तमान सरकार की तुलना राम राज्य की की और कहा कि आज जनता से जुड़े कार्याें को मंत्री तत्काल सहज स्वीकृति देते हैं।

हाथरस में रजबहों की सफाई के मुद्दे पर Minister Swatantra Dev ने तत्काल स्वीकृति दी है। हनुमान चौकी को पर्यटन स्थल बनाने के प्रस्ताव पर भी संस्कृति मंत्री ने तत्काल स्वीकृति दी है और इसके लिए बजट भी जारी कराया जा रहा है। यह भाजपा सरकार में ही संभव है। पहले बेटी पैदा होने पर परिवार को फिक्र होती थी कि उसका लालन- पालन की चिंता होती थी।

भाजपा सरकार ने इस दर्द को समझा और नारी सुरक्षा, कन्या सुमंगला योजना, कन्या विवाह योजना चलाईं। ऐसी संवेदनशील सरकार पहले कभी नहीं रही। आज नारी सुरक्षा, नारी सम्मान और नारी स्वाभिमान का भाव है। उन्होंने 'हटादो हर बाधाएं मेरे पग की, मिटादो सब आशंकाएं मन की, जमाने को बदलने की शक्ति को समझो, कदम से कदम मिलाकर चलने तो दो मुझको' पंक्तियों से अपने उद्बोधन को पूरा किया।

Edited By: Anil Kushwaha