अलीगढ़ (जेएनएन)। विश्व में ख्याति अर्जित करने वाली अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी का आतंकी कनेक्शन भी सामने आया है। यहां के रिसर्च स्कॉलर मन्नान वानी ने बीते दिनों आतंकी संगठन का दामन थामा है। आज एसएसपी के साथ टीम ने उसके कमरे की तलाशी ली है।

आतंकी संगठन हिजबुल में शामिल हुए एएमयू छात्र मन्नान वानी के कमरे की एसएसपी राजेश कुमार पाण्डेय की अगुवाई में पुलिस ने तलाशी ली है। वानी यहां के हबीब हाल हास्टल में रहता था।पुलिस ने हबीब हाल के कमरा नम्बर 206 में छापेमारी की। इस दौरान पुलिस ने उसके कमरे से कपड़े व कागजी दस्तावेज कब्जे में लिया। एएमयू के हबीब हॉल में रहने वाले वानी के कमरे में पुलिस ने छापा मारा है। इसमें उसके कमरे से कुछ संदिग्ध सामग्री मिलने की बात कही जा रही है। पुलिस ने सारी सामग्री जब्त कर ली है।

पुलिस के इस छापेमारी की कार्रवाई की जानकारी एएमयू प्रशासन व एलआईयू को नहीं थी। पुलिस के अनुसार, मन्नान वानी को दिल्ली में पकड़ा गया है। इस बीच एएमयू ने पीएचडी छात्र मन्नान वानी को निलंबित कर दिया है। मन्नान मुशीर वानी ने एएमयू से एमएससी करने के बाद एमफिल किया और अब पीएचडी में दाखिला लिया है। मन्नान और उसका एक साथी 26 जनवरी के मौके पर हमले की फिराक में थे। बताया जा रहा है कि जामा मस्जिद के पास होटल में ठहरे थे। मन्नान को हमजा कोड दिया गया था।

उत्तरी कश्मीर के कुपवाडा के लोलब गांव का निवासी मन्नान वानी एएमयू में रिसर्च स्कॉलर है। वह यहां से एमफिल एप्लाइड  जियोलॉजी से पीएचडी कर रहा था। पिछले दिनों उसने आतंक का दामन थाम लिया था। अब वह बेहद सक्रिय आतंकी है। 

जम्‍मू कश्‍मीर में एक पीएचडी स्‍कॉलर के हिजबुल मुजाहिदीन से जुड़ने की खबर सामने आई। यह पीएचडी स्‍कॉलर अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी(एएमयू) में अध्‍ययनरत था। अब जम्‍मू कश्‍मीर में सोशल मीडिया पर उसकी एके-47 लिए तस्‍वीर सामने आई है।

मीडिया ने आधिकारिक सूत्रों के हवाले से लिखा है कि पीएचडी स्‍कॉलर का नाम मनान वानी है और वह कुपवाड़ा जिले के लोलाब के ताकीपोरा गांव का रहने वाला है।वह एएमयू में जियोलॉजी में पीएचडी कर रहा था। 26 साल का वानी तीन दिन पहले घर आने वाला था,लेकिन उसने घर पर कोई खबर नहीं दी। उसके बाद ही उसका नया चेहरा हथियार के साथ सामने आया। 

वह पांच साल से एएमयू में रह रहा था और वहीं से उसने एमफिल की डिग्री ली थी। दो दिन पहले फेसबुक पर उसकी फोटो सामने आई। इसमें उसके हाथ में एके-47 राइफल थी और कहा गया कि वह पांच जनवरी को हिजबुल में शामिल हो गया। पुलिस अधिकारी ने बताया कि उसके परिवार की ओर से रविवार को गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई गई। इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई शुरू कर दी है।

पुलिस ने बताया कि जांच की जा रही है कि कैसे उसने पीएचडी की रिसर्च छोड़कर आतंक की राह अपना ली। मनान का परिवार काफी संपन्न है। उसके पिता राज्य स्कूल शिक्षा विभाग के अंतर्गत लेक्चरार हैं। उसका एक भाई जूनियर इंजीनियर है। उसने दसवीं तक की पढ़ाई लोलाब,कुपवाड़ा में स्थित जवाहर नवोदय विद्यालय से ही की है।  

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में ज्योलाजी में पीएचडी करते हुए  आतंकवाद की राह पकडऩे वाले मनान बशीर ने हालांकि सोशल मीडिया पर हथियारों संग अपनी तस्वीर वायरल कर, जिहादी बनने का एलान कर दिया है। लेकिन पुलिस अभी भी इस मामले में खुलकर बोलने से कतरा रही है। फिलहाल,उसके बारे में पता लगाने के लिए उसके परिजनों व कुछ दोस्तों से पूछताछ की गई है। 

करीब एक साल पहले वर्ष 2016 में भोपाल स्थित आईसैक्ट विश्वविद्यालय में  जल, पर्यावरण,ऊर्जा एवं समाज अंतरराष्टरीय सम्मेलन (आईसीडब्लयूईईएस) में सर्वश्रेष्ठ शोध पत्र प्रस्तुती का सम्मान अर्जित करने वाला मनान बशीर बीते पांच सालों से अलीगढ़ मुस्लिम यूनीवर्सिटी में अध्ययनरत था।  एमफिल करने के बाद ज्योलाजी में पीएचडी कर रहा मनान बशीर कुपवाड़ा के एक  संभ्रांत परिवार से संबंध रखता है। उसके पिता बशीर अहमद ने बताया कि उसे दिसंबर के अंत में घर आना था। वह अलीगढ़ से जब घर के लिए रवाना हुआ तो उसने सूचित भी किया। लेकिन वह घर नहीं पहुंचा और पांच जनवरी को सोशल मीडिया पर उसकी एक तस्वीर वायरल हुई। हमने पुलिस में उसके लापता होने की शिकायत भी दर्ज कराई है। 

उन्होंने कहा कि मुझे नहीं पता कि मेरा बेटा कब मिलीटेंट बना। वह तो पढऩे लिखने वाला नौजवान था। पिछले साल  भोपाल में आयोजित एक अंतरराष्टरीय कांफ्रेंस में उसे उसके शोधपत्र के लिए भी सम्मानित किया गया था। उसने लोलाब घाटी में बाढ़ संकट अनुमान पर शोधपत्र तैयार किया था। एसएसपी कुपवाड़ा शमशेर हुसैन ने कहा कि मनान बशीर के लापता होने की रिपोर्ट उसके परिजनों ने दर्ज कराई है। हमने सोशल मीडिया पर वायरल हुई तस्वीर का भी संज्ञान लिया है। उसके मोबाईल फोन की कॉल डिटेल्स की भी जांच की जा रही है। उसके कुछ दोस्तों और परिजनों से भी हमारी बातचीत हुई है। अलीगढ़ स्थित उसके सहपाठियों व दोस्तों से भी संपर्क किया जा रहा है।

उत्तरी कश्मीर में एलओसी के साथ सटे जिला कुपवाड़ा में टकीपोरा गांव के रहने वाले मनान बशीर वानी पुत्र बशीर अहमद वानी का हाथों में एसाल्ट राइफल लिए एक फोटो बीते तीन दिनों से लगातार सोशल  मीडिया पर वायरल हो रहा है। फोटो में उसके नाम और योग्यता व घर के पते के साथ ही आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन द्वारा प्रदान किया गया उसका कोड नाम हमजा भाई भी लिखा है। 

एएमयू ने कर दिया सस्पेंड 

आतंकी संगठन में शामिल हुए वानी को एएमयू ने सस्पेंड कर दिया है। पूरे प्रकरण पर जांच भी बैठा दी है। एएमयू का रिसर्च स्कॉलर वानी दो जनवरी तक यहीं कैंपस में ही था। वह बगैर किसी को खबर दिए चला गया। खबर यह भी है कि उसके परिजनों ने श्रीनगर में गुमशुदगी भी दर्ज कराई है।

छात्र मानने को तैयार नहीं

मीडिया में मामले सामने आने के बाद एएमयू प्रशासन में भी खलबली मची है। कुछ छात्रों ने उसके आतंकी संगठन से जुडऩे पर आश्चर्य जताया। उनका कहना था कि मन्नान ऐसा नहीं कर सकता। वह बहुत ही होशियार छात्र था। यह उसे फंसाने की साजिश हो सकती है। साथी छात्रों में से एक जुनैद ने बताया कि कैंटीन में कभी-कभार मुलाकात हो जाया करती थी। छात्रों का कहना था कि वायरल फोटो मॉर्फड भी हो सकती है। मन्नान एएमयू कैंपस में पिछले एक सफ्ताह से नहीं दिखा है। वह हबीब  हाल में रह रहा था और हाल ही में उसे भोपाल में बेस्ट पेपर प्रेजेन्टेशन के लिए अवार्ड भी मिला था।

छात्र यह यकीन मानने को तैयार नहीं हैं कि वह आतंकी बन गया है। उसके क्लासमेट का कहना है कि खबरों में मैनुपुलेशन हो सकता है। उनका कहना था कि एएमयू में लोग पढऩे में यकीन रखते हैं। मन्नान पढ़ाई में अच्छा था। साथी छात्रों ने कहा कि आरोप से पहले सरकार उसके बारे  में पूरी जानकारी एकत्र करनी चाहिए। छात्रों का ये भी कहना था कि यह एएमयू को बदनाम करने की साजिश भी हो सकती है। एएमयू प्रशासन को अभी इसकी आधिकारिक जानकारी नहीं मिली है। साफे किदवई , मेंबर इंचार्ज , जनसंपर्क विभाग ने कहा मीडिया के जरिए ही जानकारी मिली है।

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