अलीगढ़ (जेएनएन)।  बिटिया की नृशंस हत्या ने लोगों को झकझोर दिया है। इस घटना को लेकर लोग गुस्से में उबल रहे हैं। कला व साहित्य जगत से भी तीखी प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। इस जघन्य हत्याकांड से वे भी स्तब्ध हैं और दोषियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं...

रौंगटे ख़ड़े करने वाला है मामला

वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. पशुपति नाथ उपाध्याय का कहना है कि यह वीभत्स, अमानवीय, अक्षम्य व रौंगटे खड़ा कर देने वाली घटना है। पुलिस-प्रशासन व अदालत इसमें त्वरित उचित निर्णय लें। हर संवेदनशील व्यक्ति, हर समाज, हर वर्ग दुखी है। पीडि़त परिवार के प्रति सहानुभूति की जरूरत है, न कि न्याय के नाम पर उपद्रव की।

अपराधियों की पैरवी न करें

वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. नमिता सिंह का कहना है कि बहुत ही घृणित व निंदनीय घटना है। क्राइम व बुराई को धर्म से जोड़कर भी नहीं देखा जा सकता। कोई भी जाति-धर्म के आधार पर ऐसे अपराधियों की पैरवी न करें। ऐसे मामलों में पुलिस की लापरवाही सामने आती है तो सरकार को सख्त कदम उठाने चाहिए, ताकि पूरे समाज को संदेश जाए।

मनुष्य नहीं दरिंदे हैं वे

वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. वेदप्रकाश अमिताभ का कहना है कि मासूम के साथ हैवानियत करने वाले मनुष्य नहीं, दरिंदे ही हो सकते हैं। समाज और पुलिस-प्रशासन को इनके प्रति कठोरतम रुख अपनाना चाहिए। यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण व जघन्य हत्याकांड हैं। सरकार ऐसी कार्रवाई करे कि इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

तुरंत फांसी हो

कवि प्रेम किशोर पटाखा का कहना है कि मासूमों के साथ ऐसी दरिंदगी दिखाने वाले दानवों को तुरंत फांसी दे देनी चाहिए। इंसानियत व मानवता को शर्मसार ऐसी घटनाओं में पुलिस प्रशासन को त्वरित कदम उठाने चाहिए। ऐसी दङ्क्षरदों के लिए समाज में कोई जगह नहीं। जब तक ऐसे दङ्क्षरदे जिंदा हैं, हम शर्मिंदा होते रहेंगे।

 

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Posted By: Mukesh Chaturvedi