अलीगढ़, जागरण संवाददाता। पं. दीनदयाल उपाध्याय संयुक्त चिकित्सालय में करीब डेढ़ साल से बंद आपरेशन थियेटर के ताले खुल गए हैं। सर्जरी व आपरेशन की सुविधा न मिलने की शिकायत पर कार्यवाहक सीएमएस ने आपरेशन थियेटर को दुरुस्त कराने का शुरू कर दिया है। साफ-सफाई के बाद संक्रमण का पता लगाने के लिए दो बार कल्चर टेस्ट भी कराया गया है। संबंधित सर्जनों को तत्काल आपेरशन शुरू करने की चेतावनी दी गई है। आपरेशन थियेटर शुरू होते ही मरीजों की समस्या खत्म हो जाएगी।

मंडल के सबसे बड़े अस्पताल में बदहाली

इस चिकित्सालय को भले ही मंडल के सबसे बड़े अस्पताल का दर्जा हासिल हो। यहां मरीजों के लिए तमाम सुविधाएं होने के दावे भी किए जा रहे हैं, लेकिन सच ये है कि यहां करीब डेढ़ साल से न तो आंखों के आपरेशन हो रहे हैं और अन्य गंभीर व घायल मरीजों की सर्जरी व माइनर आपरेशन ही। रोजाना मरीजों को गांधी आई हास्पिटल या मेडिकल कालेज का पता बताकर टरकाया दिया जाता है। इससे गरीब मरीजों व उनके तीमारदारों को उपचार में काफी मुश्किल हो रही है।

सर्जन झाड़ रहे पलड़ा

ऐसा नहीं है कि अस्पताल में सर्जन नहीं। मरीजों को आपरेशन की सुविधा के लिए कई साल पूर्व संविदा पर सर्जन की नियुक्ति की गई। हैरानी की बात ये है कि उनके कार्यकाल में छोटे-मोटे कुछ माइनर आपरेशन ही हो पाए हैं। फिलहाल, डेढ़ साल से ओटी बंद पड़ी है। इसी तरह मोतियाबिंद व आंखों के दूसरे आपरेशन के लिए दो आई सर्जन नियुक्त हैं। पता चला है कि वरिष्ठ आई सर्जन को एडी हेल्थ ने अपने कार्यालय पर अटैच कर लिया है, जबकि उनके पास पहले से ही दो-दो संयुक्त निदेशक उपलब्ध हैं। आई सर्जन खुद भी वापसी को इच्छुक नहीं दिख रहे, लेकिन कार्यवाहक सीएमएस द्वारा एडी हेल्थ पर आई सर्जन को भेजने के लिए विशेष आग्रह किए जाने की बात सामने आई है। भरोसा भी मिला है। उधर, जनरल सर्जन को भी प्रबंधन ने साफ निर्देश दे दिए हैं कि लक्ष्य के अनुसार सर्जरी करिए, अन्यथा कार्रवाई के लिए तैयार रहें। ऐसे में अस्पताल की बंद पड़ी दोनों तरह की ओटी खुल गई हैं और उनकी साफ-सफाई का कार्य चल रहा है।

शुरू होंगी ये सर्जरी

- मोतियाबिंद

- अपेंडिक्स

- पथरी,

- सिस्ट यानि गांठ

- हल्के ट्यूमर

- हर्निया

- स्तन

- पेट

आपरेशन थियेटर बंद पड़े हुए थे, जिन्हें खुलवाकर मानक के अनुसार साफ-सफाई कराई जा रही है। आई सर्जन व जनरल सर्जन को निर्देशित कर दिया है कि जल्द आपरेशन शुरू करें, अन्यथा कार्रवाई के लिए शासन को लिखा जाएगा।

- डा. अनुपम भास्कर, कार्यवाहक सीएमएस।