अलीगढ़, जेएनएन : परोपकार सामाजिक सेवा संस्था द्वारा गांव तोछीगढ़ में जंग-ए-आजादी के महानायक "शेर-ए-पंजाब" लाला लाजपत राय की 156वीं जयंती मनाई। संस्था के सदस्यों ने ग्रामीणों के साथ मिलकर "पंजाब केसरी" लाला लाजपत राय के छायाचित्र पर माल्यार्पण करके श्रद्धांजलि दी।

गरीबी और साक्षरता पर ध्‍यान दिया

अध्यक्ष जतन चौधरी ने कहा कि लाला लाजपत राय महान समाज सुधारक, कुशल ओजश्वी वक्ता, दूरदर्शी, कुशल राजनीतिज्ञ, निर्भीक, क्रांति के पुरोधा, सच्चे राष्ट्रभक्त स्वतंत्रता सेनानी, संवेदनशील स्वतंत्र विचारक थे। जलियांवाला बाग हत्याकांड के बाद उन्होंने देश को अंग्रेजों से आजादी दिलाने का संकल्प किया था। उनकी नजर में भारत की मूल समस्या गरीबी व निरक्षरता थी। इसीलिए वो देश के युवाओं से शिक्षा पर अधिक ध्यान देने की अपील किया करते थे। उन्होने कई कॉलेज भी खुलवाए। सुरेंद्र सिंह आर्य ने कहा कि लाला लाजपत राय ने 1928 में लाहौर में "साइमन कमीशन" का विरोध किया था। जिसमें अंग्रेजी सरकार ने निहत्थे लोगों पर लाठी चार्ज करवाई थी। लालाजी के सिर में गम्भीर चोट आने की वजह से मौत हो गई। समाज सेवी टीकम सिंह ने कहा कि लालाजी द्वारा कहे गए शब्द "मेरे ऊपर किया गया एक-एक प्रहार ब्रिटिश साम्राज्य के कफन में कील बनेगा।" सदैव भारतीय इतिहास के स्वर्णाक्षरों में अंकित रहेंगे। उन्होंने 'ए हिस्ट्री ऑफ इंडिया, महाराज अशोक, अनहैप्पी इंडिया' आदि कई पुस्तकें लिखी थी। यंग इंडिया व दी पीपुल, दैनिक वंदे मातरम् आदि कई पत्रिकाओं का संपादन भी किया था। इस मौके पर किशनवीर सिंह, मनीष, कुश पाठक, मोती लाल, प्रवीन वार्ष्णेय, सलमान खान, सूरज, साधना, लोकेंद्र सिंह, गौरव आदि मौजूद रहे।

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