अलीगढ़, जागरण संवाददाता। श्री रामलीला गोशाला कमेटी, अचलताल की ओर से होने वाली रामलीला इस बार पूरी भव्यता के साथ होगी। पांच अक्टूबर से रामलीला का शुभारंभ होगा। 15 अक्टूबर को रावण दहन होगा। 16 को राजतिलक के साथ श्रीराम लीला पूर्ण होगी। हालांकि, इस बार रामलीला के मध्य में निकलने वाली शोभायात्राओं के दर्शन दर्शक नहीं कर सकेंगे। क्योंकि सारे कार्यक्रम रामलीला भवन के परिसर में होंगे। शोभायात्राएं नहीं निकाली जाएंगी। रविवार को विमल अग्रवाल की अध्यक्षता में हुई बैठक में महोत्सव को भव्य बनाने पर चर्चा हुई।

पांच अक्‍टूबर को गणेश पूजन के साथ होगा शुभारंभ

विमल अग्रवाल ने बताया कि पांच अक्टूबर को गणेश पूजन के साथ श्रीराम लीला महोत्सव का भव्य शुभारंभ होगा। भले ही पूरे कार्यक्रम परिसर में हों, मगर भव्यता में कोई कमी नहीं आने दी जाएगी। श्री आदर्श रामलीला मंडल, मथुरा के कलाकार इस बार मंचन करेंगे। इसमें इस बार तमाम चीजें नई हैं। हालांकि, अभी तक रावण दहन रामलीला मैदान में कराने का निर्णय लिया गया है। यदि शासन का कोई निर्देश आता है तो नुमाइश मैदान में भी कराया जा सकता है, मगर बिना प्रशासन के सहयोग के समिति कोई कार्य नहीं करेगी। महोत्सव संयोजक अरविंद अग्रवाल ने बताया कि रामलीला को भव्य बनाया जाएगा। नई पीढ़ी इससे जुड़ सकें इसके लिए भी समिति के पदाधिकारी ध्यान देंगे। सह संयोजक संयम पाराशर, ऋषभ गर्ग ने कहा कि हमारा सौभाग्य है कि हम अपनी परंपरा को बनाए हुए हैं। बैठक में विभिन्न व्यवस्थाएं भी बांटी गईं। वीरेंद्र शर्मा, सुरेश मित्तल, आकाश अग्रवाल, राजेश गर्ग, प्रदीप भारद्वाज, अजय मित्तल, टीनएन मित्तल, गोपाल कुमार, धर्मेंद्र अग्रवाल आदि मौजूद थे।

नियमों का किया जाएगा पालन

बैठक में तय हुआ कि कोरोना के नियमों का पालन किया जाएगा। दोनों गेट पर सैनिटाइजर की व्यवस्था की जाएगी। मास्क लगाकर आना अनिवार्य होगा।

जिम्मेदारी से करेंगे निर्वहन

नगर निगम के उप सभापति डा. मुकेश शर्मा ने कहा कि वह पूरे परिसर में स्वच्छता और लाइट आदि की व्यवस्थाएं ठीक कराएंगे। नगर निगम स्तर की कोई भी व्यवस्था होगी उसमें कमी नहीं आने दी जाएगी। एक अक्टूबर से स्वच्छता का व्यापक अभियान चलाया जाएगा।

श्रीराम लीला के मंचन का कार्यक्रम

5-श्री गणेश पूजन, नारदमोह, रावण जन्म, दिग्विजय लीला

6-श्रीराम जन्म, शंकर लीला, नामकरण, खेल

7-विश्वामित्र आगमन, ताड़का वध, मारीच-सुबाहु वध, अहिल्या उद्धार

8-धनुष भंग, सीता स्वयंवर, परशुराम संवाद

9-श्रीराम जानकी विवाह, कैकेयी का वरदान मांगना, वनगमन

10-निषाद मिलन, सुमंत विदाई, केवट की नाव से गंगा पार

11-दशरथ मरण, भरतजी का आगमन, वन को जाना

12-सूर्पणखा की नासिका भंग, खरदूषण वध

13-सीता खोज, लंका दहन

14-रामेश्वर स्थापना, अंगद रावण-संवाद, लक्ष्मण शक्ति

15-अहिरावण व रावण वध, दशहरा मेला, पुलता दहन

16-भरत व राममिलन एवं राजतिलक

(5 अक्टूबर से 16 अक्टूबर तक)

Edited By: Anil Kushwaha