अलीगढ़, जागरण संवाददाता। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने सनातन धर्म के धर्म गुरुओं को एकजुट करने की शुरुआत की है। उन्हें एक मंच पर लाया जा रहा है। अमृत महोत्सव के माध्यम से धर्म गुरुओं को आमंत्रित किया जा रहा है। वह शहर के विभिन्न कार्यक्रमों में देश के वीर सपूतों के बारे में बोल रहे हैं। इसके माध्यम से समाज के लोगों से परिचय भी कर रहे हैं।

अमृत महोत्‍सव का आयोजन

आरएसएस ने आजादी के 75 वर्ष पूरे होने पर पूरे देश में अमृत महोत्सव का आयोजन किया है। शहर से लेकर देहात तक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। महानगर नगरों में नगर के अनुसार और देहात में खंड के अनुसार कार्यक्रम हो रहे हैं। इन कार्यक्रमों में देश के उन वीर सपूतों के बारे में जानकारी दी जा रही है, जो इतिहास के पन्नों पर किसी कारणवश नहीं आ सकें हैं, मगर उनका योगदान बड़ा है। इसलिए ऐसे वीर सपूतों को खंखाल कर बाहर लाने का काम किया जा रहा है। आरएसएस ने पहली बार इन आयोजनों में हिंदू धर्म गुरुओं को लगाया है। मठ, मंदिर के धर्म गुरु कार्यक्रम में संबोधित कर रहे हैं। धर्मशाला और सेवा कार्य में जुड़े लोगों को भी इस कार्यक्रम में लगाया जा रहा है। संघ का मानना है कि आजादी की लड़ाई में हमारे धर्म गुरुओं का भी बहुत बड़ा योगदान रहा है। मठ और मंदिरों में बैठकें हुआ करती थीं। क्रांतिकारी इन स्थानों को मुफीद माना करते थे। इसलिए धर्म गुरुओं से अच्छा इतिहास कोई और नहीं बता सकता है, उन्हें ऐसे क्रांतिकारियों के बारे में भी जानकारी हो सकती है जिनका नाम इतिहास के पन्नों पर अंकित नहीं हो सका है।

हमारा इतिहास गौरवशाली

सावरकर नगर के नगर कार्यवाह प्रदीप पांडेय ने कहा कि देश और धर्म पर जब भी कोई आंच आई तो धर्म गुरुओं ने कमान संभाली, वो आगे आए और उन्होंने साहस का परिचय दिया। आजादी के अमृत महोत्सव में एक बार फिर उनकी भूमिका है। इस बार दूसरे तरह की भूमिका है। धर्म गुरु स्वयं इतिहास खंखाल कर लोगों को बता रहे हैं। इससे तमाम नई जानकारियां आ रही हैं, बहुत से लोग हैं, जिसे सुनकर लोग रोमांचित भी हो रहे हैं। प्रदीप पांडेय ने कहा कि हमारा इतिहास गौरवशाली है। क्रांतिकारियों के शौर्य और वीरता से भरा हुआ है। यहां छोटा सा भी बच्चा देश के लिए मर मिटने को तैयार रहता है। ऐसे पुण्य भूमि पर एक बार फिर स्वर्णिम इतिहास को खंखाला जा रहा है, जो गौरव की बात है। नई पीढ़ी को इससे तमाम जानकारियां मिल रही हैं।

Edited By: Anil Kushwaha