केसी दरगड़, अलीगढ़ : अधिकांश पोखरों पर अतिक्रमण है। अगर कुछ सुरक्षित हैं तो उनमें पानी की कमी है। अत्यधिक दोहन से भूगर्भ जल लगातार गिर रहा है। शहर के 70 वार्डो में से 19 अतिदोहित व संकटपूर्ण श्रेणी में आ गए है। हैंडपंप की बो¨रग 150 फुट तक फेल हो चुकी है। अब बो¨रग 200- 250 फुट तक करानी पड़ रही है। ट्यूबवेल की बो¨रग तो 450-500 फुट पर हो रही है। ऊपरकोट क्षेत्र में दो ट्यूबवेल फेल हो चुके है। अब नए ट्यूबवेल की बो¨रग 500 फुट पर कराई जा रही है। यह पानी भी औद्योगिक क्षेत्रों में दूषित होता जा रहा है। कुछ इलाकों में बो¨रग कर बिना ट्रीटमेंट के पानी भूजल में छोड़ा जा रहा है। भूगर्भ जल स्तर गिरने के कारण : यहां वर्षा जल संचय के लिए रेन वाटर हार्वेस्टिंग अनिवार्य है लेकिन इसका पूरी तरह पालन नहीं हो पा रहा है। इस कारण हर बारिश में पानी यूं ही बह जाता है। इस पानी को फिर से प्रयोग करने के लिए ट्रीटमेंट का कोई इंतजाम नहीं है। उधर, सबमर्सिबल के लिए अंधाधुंध बो¨रग कराई जा रही है। सबमर्सिबल से सबसे अधिक पानी का दोहन हो रहा है। पोखरों की स्थिति : शहर में 21 पोखर नगर निगम के रिकॉर्ड में दर्ज हैं लेकिन अधिकांश पर या तो कब्जे हैं या पानी कम है और कुछ पोखरों में तो पानी ही नहीं है। कोर्ट में विवाद भी चल रहे हैं। उदाहरण के तौर पर गूलर रोड पर 29 बीघा 16 बिस्वा जमीन में 18 बीघा पर कब्जा हो चुका है। कमोवेश यही स्थिति कालीदह, रावणटीला, भमोलामाफी, चरखवालान, पला साहिबाबाद व अन्य पोखरों की है। ये वार्ड हैं अतिदोहित व संकटपूर्ण श्रेणी में : 26,27,10,54,14,57,64,70,55,56,34,6325,50,41,47,18,16 व 38। यही हाल रहा तो और वार्ड भी बढ़ सकते हैं। पेयजल की स्थिति : शहर में पीने के पानी के लिए सिर्फ भूगर्भ जल है। नगर निगम के जलकल विभाग व खुद के सबमर्सिबल के माध्यम से उपलब्ध हो पा रहा है। शहर की दस लाख की आबादी में हर आदमी के लिए 140-150 लीटर पानी की जरूरत है लेकिन लगभग 90 लीटर पानी ही उपलब्ध हो पा रहा है। सतही पानी के इंतजाम की कोशिश नाकाम : शहर में पानी की जरूरत को देखते हुए 2007 में अपर गंग कैनाल सुमेरा झाल से 50 क्यूसेक पानी के लिए शासन से स्वीकृति ली जा चुकी है लेकिन अभी तक ट्रीटमेंट प्लांट व भूमिगत जलाशय के लिए जगह नहीं मिल पाई है। ऐसे में पानी की उपलब्धता बढ़ाने की उम्मीद धूमिल हो गई है। भूगर्भ जल स्तर लगातार गिर रहा है। अब 100 फुट पर पानी नहीं मिलता है। 150 फुट से नीचे की बो¨रग हो रही है।

बीके मिश्रा, अधिशासी अभियंता, जलकल नगर निगम

विशेषज्ञों की राय

अगर हम कुल जमीनी क्षेत्रफल के पांच फीसद क्षेत्र में वर्षा जल को इकट्ठा कर सकें तो एक बिलियन लोगों को 100 लीटर पानी प्रति व्यक्ति मिल सकता है। स्थिति यह है कि एक फीसद भी व्यावसायिक व रिहायशी इलाकों वर्षा जल संचय नहीं हो रहा है। पोखर और तालाबों में कूड़ा डालकर भर दिया है या पक्के निर्माण कर लिए हैं। औद्योगिकीकरण के कारण भूजल भी प्रदूषित होता जा रहा है।

प्रो. लियाकत अली राव, सेवानिवृत्त, भूगर्भ विज्ञान एएमयू। पोखर की जमीन में सड़क

कालीदह में नगर निगम की पोखर है। इस पोखर पर कूड़ा काफी पहले से डाला जाता रहा है। इसके बीच में सड़क भी बना दी गई है। इसे से लेकर कई बार शिकायत भी हुई। इसी प्रकार गूलर रोड व अन्य पोखरो की जमीन में सड़के बनाई गई हैं।

पब्लिक बोल

शहर में भूगर्भ जल स्तर बढ़ाने के लिए लोगों को सहयोग करना चाहिए।

लल्ला शर्मा सबमर्सिबल का पानी बेकार में नहीं बहाना चाहिए।

प्रवीन उपाध्याय वर्षा जल संचय के लिए रेन वाटर हार्वेस्टिंग की जरूरत है।

उमेश वाष्र्णेय पोखरों पर अतिक्रमण रोकना चाहिए। उनमें पानी जरूरी है।

आशू गुप्ता

Posted By: Jagran