अलीगढ़ [जेएनएन]: कोरोना वायरस संक्रमण का नाम सुनते ही पैरों तले जमीन खिसकने लगती है। संक्रमितों को पड़ोसी भी हीनभावना से देखने लगते हैं। ऐसे में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के जेएन मेडिकल कॉलेज के टीबी व छाती रोगों के विभाग में प्रो. मोहम्मद शमीम नजीर बन गए हैं। रविवार को वे कोरोना संक्रमित पाए गए थे। घर पर ही इलाज करा रहे हैं, साथ में टेलीमेडिसिन के जरिये दूसरे मरीजों का भी इलाज कर रहे हैैं। सोमवार को पहले दिन दस मरीजों को सलाह दी।

बहादुरी का दिया परिचय

रविवार को प्रो. शमीम, एक सीनियर रेजीडेंट और दो नर्सिंग स्टाफ संक्रमित मिले थे। सभी के परिजनों के सैंपल लिए गए। प्रो. शमीम के परिवार के पांच सदस्यों व एक कामवाली का सैंपल लिया गया। इस हालात में भी प्रो. शमीम ने कोरोना से जंग में बहादुरी का परिचय दिया है। उन्होंने दैनिक जागरण को बताया कि टीबी के जो मरीज उनके संपर्क में हैं, उनके फोन आ रहे थे। वो इलाज को लेकर ङ्क्षचतित थे। ऐसे में उन्हें कैसे छोड़ देते, इसलिए टेलीमेडिसिन का रास्ता अपनाया। सोमवार को दस से अधिक मरीजों को इलाज के बारेे में बताया। टेलीमेडिसिन में जूनियर डॉक्टरों को गाइड कर मरीजों का इलाज कराया जा रहा है।

चिकित्सकों के लिए सेवाएं देना जरूरी

प्रो. शमीम ने कहा कि अन्य विभागों के चिकित्सक भी आइसीटी गैजेट््स, टेलीफोन व स्मार्ट आदि का प्रयोग कर रोगियों को चिकित्सकीय परामर्श करना जारी रख सकते हैं। कोविड-19 से संक्रमित होने का खतरा चिकित्सकों के लिए बना रहता है। सभी नकारात्मक परिस्थितियों में भी चिकित्सकों के लिए सेवाएं देना जरूरी होता है। उन्होंने कहा कि उनका व्यक्तिगत अनुभव है कि खुद संक्रमित होने के बावजूद अन्य रोगियों से साहस प्राप्त हुआ है। मेेडिकल कॉलेज के ङ्क्षप्रसिपल प्रो. शाहिद अली सिद्दीकी ने कहा कि अब तक 27 कोविड-19 संक्रमित रोगी पूर्ण रूप से स्वस्थ होकर छुट्टी पा चुके हैं।

कुलपति ने की तारीफ

एएमयू कुलपति प्रो. तारिक मंसूर ने कहा कि कोविड-19 से लड़ाई में हमारे डॉक्टर सराहनीय सेवाएं दे रहे हैं। प्रो. शमीम ने साहसिक कदम उठाया है।

Posted By: Sandeep Saxena

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