अलीगढ़ : बाल यौन शोषण के प्रकरणों में सामने आया है कि ऐसे कुकृत्य किसी न किसी करीबी व चहेते (डियरेस्ट एंड नियरेस्ट) द्वारा ही अंजाम दिए जाते हैं। अभिभावक बच्चों को इतना खुला माहौल नहीं दे पा रहे कि वे सेक्सुअल एब्यूज पर अपनी जुबान बेहिचक खोल सकें। शायद यही कमी इस भयावहता की जननी है। अगर इस प्रकरण पर बच्चों की जुबान खुलने लगे तो निश्चित ही यौन शोषण के प्रकरणों पर लगाम लग सकती है।

दैनिक जागरण की 'बाल यौन शोषण अब बस' मुहिम के तहत ब्रिलिएंट पब्लिक स्कूल में बच्चों संग हुई कार्यशाला में ये बातें प्रधानाचार्य श्याम कुंतेल ने कहीं। कार्यशाला में दिल्ली से आई विषय विशेषज्ञ मानवी खंडूजा ने छात्र-छात्राओं को बाल यौन शोषण पर खुलकर जानकारी दी। प्रोजेक्टर के जरिये उनको गुड टच, बैड टच और उसका जिक्र करते बच्चे की शॉर्ट मूवी भी दिखाई। संचालन ¨हदी शिक्षक चंद्रशेखर ने किया।

रोंगटे खड़े करने वाली थी चुनौती

कार्यशाला में दैनिक जागरण के संपादकीय प्रभारी नवीन सिंह पटेल ने बच्चों को बताया कि इस पेचीदा मसले पर मुहिम चलाना रोंगटे खड़े करने वाली चुनौती थी। जब संस्थान ने इसकी शुरुआत की तो कई गंभीर मामले सामने आए। संजीदा प्रकरण पर पहले एक ने बोला, उनको पढ़कर दूसरे ने बोला फिर तीसरे ने.. और ये जागरूकता का कारवां बढ़ता गया। दैनिक जागरण की इस मुहिम व सभी कार्यक्रमों में साथ खड़े रहने के लिए ब्रिलिएंट पब्लिक स्कूल परिवार का आभार भी जताया।

जब अटक गई बच्चों की जुबां

मानवी ने जब हॉल में मौजूद छात्र-छात्राओं से बॉडी के प्राइवेट पार्ट के नाम माइक पर पूछे तो बच्चों की जुबां अटक गई। इस पर प्रधानाचार्य ने बच्चों को प्रेरित किया। कहा, पढ़ाई में सब पढ़ते हैं लेकिन, जब तक बोलेंगे नहीं तब तक कार्यशाला का मकसद पूरा नहीं होगा। तब छात्र-छात्राओं ने प्राइवेट पार्ट के नाम बताए। बच्चों की यही झिझक दूर करना, इस संजीदा विषय पर उनको खुलकर बुलवाना ही दैनिक जागरण की मुहिम है।

'नो' की होगी प्रैक्टिस

मानवी ने प्रधानाचार्य से आग्रह किया कि बच्चों को सुबह प्रार्थना सभा में बैड टच से बचने के लिए तेज ध्वनि में नो बोलने की प्रैक्टिस भी कराई जाए।

विद्यार्थियों के बोल

ब्रेन को एक्टिव रखने की मिली सीख

क्वार्सी में रहने वाली खुशी ने बताया कि बढि़या जागरूकता कार्यक्रम है। खुद अपनी दोस्त को इससे जूझते देखा था। ऐसी किसी घटना में ब्रेन को एक्टिव रखने की सीख मिली है।

तेज आवाज में नो कहना सीखो

अतरौली की पूर्वी ने बताया कि इस विषय पर इतनी बेबाकी से कोई नहीं बताता। ये जानकारी जरूरी हैं, बैड टच पहचानना व तेज आवाज में नो कहना भी सीखा।

हर स्कूल में हो ऐसा कार्यक्रम

पीएसी की 38 बटालियन में रहने वाले दिशभ सिंह का कहना है कि किसी दूसरे के साथ गलत हो तब भी जोर से नो चिल्लाना है, ये नई बात सुनने को मिली। ये कार्यक्रम हर स्कूल में होना चाहिए।

अभिभावक भी बच्चों को सब बताएं

कासिमपुर के रिदम शर्मा ने बताया कि इस विषय पर खुलकर बात करने व जानकारी मिलने से हिचक कम हुई है। अभिभावक भी बच्चों को सब बताएं तो काफी सुधार आ सकता है।

Posted By: Jagran