हाथरस (जेएनएल)। यदि आपका कोई परिचित बीमार है, तो दवा के लिए जन औषधि केंद्र जाना शायद परेशान होना जैसा ही हो। बागला अस्पताल में प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र तो हैं, लेकिन इस केंद्र पर हर मर्ज की दवा नहीं है। आपातकाल में दवा के लिए बाजार जाना ही उचित रहेगा। औषधि केंद्र जाना समय बर्बाद करना ही है। हालांकि इसकी जानकारी अधिकारियों को भी है, लेकिन इस मर्ज का इलाज उनके पास भी शायद नहीं है। 

चिकित्सकों की लिखी अधिकतर दवा न मिलने से लोग दवा की दुकानों पर जाने को विवश होते हैं। संचालक ने करीब डेढ़ सौ प्रकार की दवाइयों की डिमांड पोर्टल पर की है। मौजूदा समय में सिर्फ 40 दवाइयां ही उपलब्ध हैं, जबकि 850 दवाएं होनी चाहिए। ताकि सस्ती दवा का लाभ गरीब लोगों को मिल सके, लेकिन एेसा हो नहीं पा रहा। दवा के अभाव में औषधि केंद्र का उद्देश्य पूरा नहीं हो पा रहा। 

महंगी दवाइयों से निजात दिलाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विशेष पहल की। यहां भी प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्रों की स्थापना कराई गई।  बागला संयुक्त अस्पताल में औषधि केंद्र की शुरुआत तीन सितंबर को करा दी गई थी। आनन-फानन शुरुआत तो हो गई, लेकिन मरीजों को पूरी तरह से योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है। करीब दो सौ तरह की दवाइयां इस औषधि केंद्र में होनी चाहिए, लेकिन औषधि केंद्र पर सिर्फ चालीस दवाएं ही उपलब्ध हैं।

दवा जल्द आने की उम्मीद 
दवा न मिलने पर तमाम मरीजों को लौटना पड़ा। खास बात यह है मरीजों को इस समस्या से काफी दिनों से जूझना पड़ रहा है। बावजूद इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। गरीब मरीजों को मजबूरन महंगी दवाइयां खरीदनी पड़ रही हैं। इससे उनका बजट और अधिक गड़बड़ा गया है। औषधि केंद्र संचालक गिरीश कुमार ने बताया कि 40 प्रकार की दवाएं फिलहाल हैं। मरीजों को जो असुविधा हो रही है, उसे दूर करने के लिए करीब डेढ़ सौ प्रकार की दवाइयों की लिस्ट पोर्टल पर भेजी जा रही है। जल्द ही दवाएं आ जाने पर मरीजों को लाभ मिलेगा।