राजना रायण सिंह, अलीगढ़ : नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के अयोध्या पर दिए गए बेतुके बयान की उनके देश में ही नहीं, बल्कि दुनिया में निंदा हो रही है। ओली ने अयोध्या को नेपाल में बताया था। लोगों का कहना है कि ओली को कुछ पता ही नहीं है। वे मनगढ़ंत कहानी सुना रहे हैं। झूठी बातें बता रहे हैं। भगवान श्री राम तो हमारे हैं। हमारे देश के हैं। यहां की धरती पर उनके निशान मौजूद हैं। प्रभु श्रीराम ने अलीगढ़ की भी धरती को धन्य किया है। विश्वामित्र के नाम से प्रसिद्ध बेसवां में वह आए थे और उन्होंने यहां ताड़का नामक राक्षसी का वध किया था। 

विश्वामित्र के साथ आए थे 

त्रेतायुग में धरती राक्षसों के आतंक से भयभीत थी। बेसवां विश्वामित्र की तपोभूमि थी। ऋषि-मुनियों के पूजन और हवन करने पर राक्षस विघ्न डाला करते थे। तब विश्वामित्र अयोध्या पहुंचे और राजा दशरथ से प्रभु श्रीराम और लक्ष्मण को मांगा। अयोध्या से लेकर वह बेसवां पहुंचे और यहां पर प्रभु श्रीराम और लक्ष्मण ने यज्ञ की रक्षा की। यहां ताड़का नामक राक्षसी का वध भी किया। इसके बाद से यह धरती विश्वामित्र के नाम से प्रसिद्ध हो गई। बेसवां के लोग ओली के इस तर्क को कि अयोध्या नेपाल में हैं उसे बचकाना बता रहे हैं। उनका कहना है कि अयोध्या से ही श्रीराम बेसवां आए थे, यह धर्मग्रंथों में भी वर्णित है। 

अपना ज्ञान और बढ़ा लें 

कारोबारी बनवारी लाल राठी का कहना है कि अयोध्या से चलकर प्रभु श्रीराम बेसवां आए थे। यह सारी दुनिया को पता है। भारत के बच्चे-बच्चे से अयोध्या के बारे में पूछ लीजिए तो वह बता देगा। इसलिए ओली अपना ज्ञान और दुरुस्त कर लें। समाज सेवी रामबाबू अग्रवाल का कहना है कि नेपाल के प्रधानमंत्री सुर्खियों में बने रहना चाहते हैं, इसलिए उन्होंने ऐसा बयान दिया है। अरे, अपना देश तो वो संभाल नहीं पा रहे हैं इसलिए उल्टे-सीधे बयान देकर वह दुनिया का ध्यान भटकाना चाहते हैं। 

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