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अलीगढ़ (जेएनएन)।  स्मार्ट सिटी परियोजना की सूची में अलीगढ़ 77वें पायदान से सरक कर 52वें पायदान पर भले ही आ गया, लेकिन इस उपलब्धि जैसा कोई काम धरातल पर नजर नहीं आ रहा। करोड़ों की जिन योजनाओं को लागू करने के दावे नगर निगम अफसरों ने गा-बजाकर किए थे, उनमें से एक भी सफलता की सीढ़ी नहीं चढ़ पा रही। अनियोजित क्रियांवयन से शहर बदहाल जरूर हो गया। न नाले ठीक से बनें, न स्ट्रीट लाइटें जलीं। चौराहों व अचल ताल के सुंदरीकरण, वाटर लाइन, कूड़ा कलेक्शन और इसके निस्तारण जैसे दावे भी खोखले साबित हो रहे हैं। ये स्थिति तब है, जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ क्रियांवयन की धीमी गति पर आपत्ति जता चुके हैं।

मुसीबत बने अधूरे काम
स्मार्ट सिटी के अधूरे पड़े काम लोगों के लिए मुसीबत बन गए हैं। समय सीमा का पालन तो दूर जिम्मेदारों को सड़कों पर पड़ा मलवा उठाने तक की चिंता नहीं है। जबकि इसके कारण आवागमन प्रभावित हो रहा है, जाम तक लग जाता है। दूर न जाया जाए तो शहर की धड़कन कहे जाने वाला सेंटर प्वाइंट चौराहा ही देख लें। नाला खोदाई में निकला मलवा सड़क किनारे ही पड़ा है। यही नहीं, बारिश के दिनों में भी वाटर और सीवर लाइन बिछाने के लिए शहर के कई हिस्सों में खोदाई चलती रही। इनमें शहर का सबसे पॉश इलाका सिविल लाइंस मुख्य है। जिस सड़क पर सड़क खोदी जाती है वहां की गलियां चलने लायक नहीं रहतीं, क्योंकि लाइन डाल भी दी जाए तो सड़क समतल नहीं कराई जाती। इससे सड़क धंस जाती है। ऊपर से बारिश हो जाए तब तो यहां से बिना गिरे निकलना संभव नहीं है। सीवर लाइन की खोदाई के चलते कई जगह वाटर लाइन क्षतिग्रस्त हो चुकी है, जिसे ठीक नहीं कराया गया।

कुछ योजनाओं की स्थिति
प्रोजेक्ट, लागत (करोड़ में), अवधि, क्रियांवयन

सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट, 220.54, दो साल, 27 मार्च

वाटर सप्लाई, 42.80, दो साल, 15 जनवरी

वेस्ट वाटर ट्रीटमेंट, 75, 18 माह, नहीं

स्टॉर्म वाटर ड्रेनेज, 152.34, 18 माह, नहीं

स्मार्ट रोड (सिविल वर्क), 10.20, एक साल, नहीं

स्मार्ट रोड (इलेक्ट्रीकल वर्क), 6.69, एक साल, नहीं

रेन वाटर हॉर्वेस्टिंग, 0.68, तीन माह, नहीं

स्मार्ट टॉयलेट, 0.77, छह माह, नहीं

Posted By: Sandeep Saxena

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