हाथरस(जेएनएन)। रस की नगरी हाथरस में अनेक ऐसे मंदिर हैं जो अति प्राचीन हैं। सैकड़ों साल का इतिहास समेटे हुए हैं। आज भी ये मंदिर आस्था का केंद्र हैं। इनमें शामिल अलीगढ़ रोड स्थित नवग्रह मंदिर 151 साल पुराना है, जिसके प्रति हाथरस ही नहीं, आसपास के जिलों के लोगों की भी अपार आस्था है। हनुमान जयंती के मौके पर यहां मेला लगता है। मंगलवार व शनिवार को दूर दराज से भक्त दर्शनों को आते हैं।

इस मंदिर की स्थापना शहर के अग्रवाल परिवार ने 1868 में कराई थी। उस समय यहां पर घना जंगल था।  मंदिर में नवग्रह के साथ ही देवी मां व हनुमान जी की प्रतिमा विराजमान हैं। 1907 में इस परिसर को हनुमान जी महाराज के नाम कर दिया गया।

56 भोग के साथ फूल बंगला

शुरूआत में मंदिर में कुछ ही लोग आते थे, लेकिन घीरे-घीरे मंदिर के प्रति लोगों में आस्था बढ़ती चली गई। अब तो हर रोज सुबह व शाम मंदिर पर भीड़ रहती है। मंगलवार व शनिवार को तो मेला जैसा नजारा होता है। यहां पर विभिन्न स्थानों के भक्त दर्शनों के लिए आते हैं और मन्नत मांगते हैं। जिसे पूरा होने पर यहां पर 56 भोग, फूल बंगला के कार्यक्रम भी कराते हैं। 

खाली हाथ कोई नहीं लौटता

पुजारी दिनेश कुमार का कहना है कि मंदिर में विराजमान हनुमान प्रतिमा चमत्कारिक है। कोई भी भक्त यहां से खाली हाथ नहीं लौटा है। करीब 150 साल पुराने इस मंदिर के प्रति लोगों में आस्था में है। भक्त मुकेश कुमार का कहना है कि मंदिर के इतिहास के बारे में बुजुर्गों से सुना है। मंदिर में जाकर दर्शन भी किए हैं। यहां विराजमान हनुमान प्रतिमा सभी बाधाओं को हरती है। हनुमान जयंती पर यहां पर मेला भी लगता है।

 

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Posted By: Mukesh Chaturvedi

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