अलीगढ़ [जेएनएन]: राष्ट्रीय अल्पसंख्यक शिक्षा निगरानी समिति के सदस्य डॉ. मानवेंद्र प्रताप सिंह ने कहा है कुलपति का धरना स्थल पर जाना दोहरे चरित्र का उदाहरण है। एक तरफ  कुलपति जिला प्रशासन से अपनी सुरक्षा की गुहार करते हैं, फिर उन्हीं के बीच धरने पर चले जाते हैं, जिनसे खतरा बताते हैं, इससे प्रतीत होता है कि कुलपति और रजिस्ट्रार उपद्रवियों के साथ है और धरने के संचालक हैं। कुलपति यूनिवर्सिटी संभालने की स्थिति में नहीं है। पहले विवि को खोलने में विलंब करना और अब परीक्षाओं की तिथि को आगे बढ़ाना उनकी कार्यक्षमता पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।

ये लगाए आरोप

राष्ट्रीय अल्पसंख्यक शिक्षा निगरानी समिति के सदस्य ने कहा है कि जिस प्रकार से दिल्ली के शाहीन बाग में पैसे देकर लोग धरने पर बैठाए गए हैं, उसी प्रकार एएमयू धरना संचालित है। कुलपति यूनिवर्सिटी संभालने की स्थिति में नहीं है। पहले विवि को खोलने में विलंब करना और अब परीक्षाओं की तिथि को आगे बढ़ाना उनकी कार्यक्षमता पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।

सेना के अधिकारी बनें एएमयू कुलपति

 केंद्र सरकार को तुरंत निर्णय लेते हुए उनके स्थान पर किसी सेना के अधिकारी को कुलपति के रूप में नियुक्त करना चाहिए। इस बारे में केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय से बात की जाएगी।

यह है वजह

बताते चलें कि 15 दिसंबर को एएमयू में बवाल हो गया था। इसको लेकर एएमयू छात्रों का निरंतर धरना चल रहा है। बुधवार को छात्रों ने काला दिवस करार देकर बुधवार को कैंडल मार्च भी निकाला था। गुरुवार दोपहर करीब 12 बजे छात्र आर्ट फैकल्टी के बाहर इकट्ठा हुए, जहां से मार्च निकालते हुए बाबे सैयद गेट पर पहुंचे। एएमयू शिक्षकों ने भी मार्च निकाला और नागरिकता संशोधन कानून का विरोध किया।

Posted By: Sandeep Saxena

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