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शादी की फोटो-वीडियो नहीं देना फोटोग्राफर को पड़ा भारी, आयोग ने लगाया अलीगढ़ में एक लाख रुपये का हर्जाना

By Santosh Sharma Edited By: Prateek Gupta
Published: Fri, 24 Jul 2026 08:57 PM (IST)

अलीगढ़ उपभोक्ता आयोग ने शादी की फोटोग्राफी-वीडियोग्राफी की सेवाएं न देने पर एक फोटोग्राफर को एक लाख रुपये मुआवजा देने ...और पढ़ें

सांकेतिक तस्वीर।

सांकेतिक तस्वीर।

जागरण संवाददाता, अलीगढ़। शादी की फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी का पूरा भुगतान लेने के बावजूद तय सेवाएं उपलब्ध नहीं कराने पर जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने फोटोग्राफर के खिलाफ कड़ा फैसला सुनाया है। आयोग ने फोटोग्राफर को शादी का पूरा फोटो-वीडियो रिकार्ड और प्रिंटेड एल्बम उपलब्ध कराने के साथ ही उपभोक्ता को एक लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है।

आदेश का पालन न होने पर कानूनी कार्रवाई करते हुए जेल तक भेजे जाने की चेतावनी भी दी गई है। दुबे का पड़ाव निवासी पल्लवी मोहन ने आयोग में दायर वाद में बताया कि उन्होंने 19 मई 2022 को दिल्ली के लक्ष्मी नगर स्थित मोंक वीडियोज के संचालक रवि मदन से अनुबंध किया था

समझौते के अनुसार 8 दिसंबर 2022 को ईडन गार्डन मैरिज हॉल में आयोजित विवाह समारोह की फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी और प्रिंटेड एल्बम तैयार कर उपलब्ध करानी थी। इसके एवज में उन्होंने 1.20 लाख रुपये का पूरा भुगतान भी कर दिया था।

शिकायत के अनुसार भुगतान लेने के बाद भी फोटोग्राफर ने न तो शादी की तस्वीरें और वीडियो उपलब्ध कराए और न ही एल्बम तैयार करके दी। कई बार संपर्क और अनुरोध करने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ, जिसके बाद पीड़िता ने जिला उपभोक्ता आयोग की शरण ली

आयोग की ओर से नोटिस जारी किए जाने के बावजूद विपक्षी रवि मदन न तो सुनवाई में उपस्थित हुए और न ही अपना पक्ष रखा। इसके बाद अध्यक्ष हसनैन कुरैशी और सदस्य पूर्णिमा सिंह राजपूत की पीठ ने एकपक्षीय सुनवाई करते हुए माना कि भुगतान लेने के बावजूद सेवा उपलब्ध न कराना उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन और सेवा में स्पष्ट कमी है।

आयोग ने अपने आदेश में फोटोग्राफर को विवाह समारोह से संबंधित सभी फोटो, वीडियो और प्रिंटेड एल्बम शिकायतकर्ता को सौंपने तथा मानसिक पीड़ा और असुविधा के लिए एक लाख रुपये मुआवजा देने का निर्देश दिया है। यह आदेश 45 दिनों के भीतर पूरा करना होगा।

निर्धारित अवधि में आदेश का पालन नहीं होने पर उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 की धारा 72 के तहत अभियोजन चलाया जाएगा, जिसमें कारावास का प्रावधान भी है।