अलीगढ़ [ जेएनएन ] : एएमयू में भड़काऊ बयान देन के आरोप में मथुरा जेल में बंद डॉ. कफील खान पर रासुका लगाने से एएमयू छात्र खासे नाराज हैं। उन्होंने कार्रवाई को सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन बताया है। रविवार को मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर व कैंपस के छात्रों ने रिहाई की मांग को लेकर कैंपस में मार्च निकाला। 

डॉ. कफील को बेल होने के बार रासुका लगाई है

एएमयू के मेडिकल कॉलेज के जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. हमजा मलिक की अगुवाई में निकाला गया मार्च बाबे सैयद पर समाप्त हुआ। जहां सीएए के विरोध में धरना चल रहा है। मार्च में जूनियर डॉक्टरों के अलावा एएमयू के छात्र नेता भी शामिल हुए। मोदी व योगी सरकार के खिलाफ नारेबाजी भी की। छात्र नेता फैजुल हसन ने कहा कि डॉ. कफील को बेल होने के बार रासुका लगाई है। रमेश बनाम एटा के जिलाधिकारी का उदाहरण देते हुए बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने इस केस में व्यवस्था दी थी कि एक बार बेल होने के बाद रासुका नहीं लगाई जा सकती। जिला प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन किया है। सरकार व जिला प्रशासन से मांग की कि रासुका हटाई जाए। 

छात्रों को पीटते हुए का वीडियो वायरल 

एएमयू छात्र नेताओं ने एक वीडियो वायरल किया है, जिसे जामिया मिल्लिया का बताया जा रहा है। फैजुल हसन के अनुसार वीडियो 15 दिसंबर का है। पुलिस ने लाइब्रेरी में घुसकर छात्रों को पीटा था। जबकि दिल्ली पुलिस अभी तक इनकार करती आ रही थी कि उसने छात्रों के साथ ऐसा कुछ नहीं किया। सरकार को इस पर जवाब देना चाहिए। 

नदीम अंसारी भी मार्च में दिखे 

कैंपस में निकाले गए मार्च में पूर्व छात्र संघ उपाध्यक्ष नदीम अंसारी भी नजर आए। जिला प्रशासन ने नदीम को माहौल खराब करन के आरोप में जिला बदर कर रखा है। ऐसे में सवाल उठने लगा है कि जिसे जिला बदर किया गया हो क्या वह विरोध प्रदर्शन कर सकता है?

Posted By: Sandeep Saxena

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