जासं, अलीगढ़ : कोरोना के बढ़ते मामलों के साथ ही आक्सीजन की किल्लत कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। मंडलायुक्त ने एक बार फिर उद्यमी, व्यापारी व अन्य सक्षम लोगों से आक्सीजन सिलिडर दान करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि आपदा के समय हम जितना एक दूसरे की मदद कर सकते हैं करें। यह जरूरी नहीं कि मदद के रूप में धनराशि ही दी जाए। मंडलायुक्त ने कहा कि चिकित्सकीय विशेषज्ञों की राय के हिसाब से इस संकट की घड़ी में कोरोना वायरस सीधे गला और फेफड़ों पर वार कर रहा है और आक्सीजन के अभाव में संक्रमित व्यक्ति की मृत्यु हो जा रही है। यदि व्यक्ति को समय से सही सलाह इलाज और आक्सीजन उपलब्ध हो जाए तो संक्रमित व्यक्ति को मृत्यु के मुंह में जाने से बचाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि यदि उनके पास खाली आक्सीजन सिलिंडर घर या प्रतिष्ठान में अनावश्यक रूप से रखे हुए हैं, तो वह सिटी मजिस्ट्रेट के पास अपनी धरोहर के रूप में जमा करा सकते हैं। इससे पीड़ित मानवता की सेवा कर सकेंगे। आपके घर पर रखा हुआ खाली आक्सीजन सिलिंडर किसी संक्रमित व्यक्ति को मौत के मुंह में जाने से बचा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि भविष्य में आपको आक्सीजन सिलिडर की आवश्यकता पड़ती है तो उसे वापस कराया जाएगा।

हरदुआगंज तापीय परियोजना के मुख्य अभियंता ने डीएम को लिखा पत्र: हरदुआगंज तापीय विद्युत परियोजना के अधिकारियों एवं कर्मचारियों के लिए परियोजना चिकित्सालय में आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था बनाए जाने की मांग की गई है। मुख्य अभियंता आरके वाही ने डीएम को लिखे पत्र में कहा है कि परियोजना परिसर में प्रभावी चिकित्सा व्यवस्था की अति आवश्यकता है। कोरोना की लहर को देखते हुए अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए 20 आक्सीजन सिलिडर के रिफिल की व्यवस्था की गई थी, मगर वो खत्म होने वाले हैं। मुश्किल से दो सिलिडर बचे हैं। ऐसी स्थिति में 30 आक्सीजन सिलिडर और दिलाए जाएं। वाही ने बताया कि विद्युत उत्पादन में 24 घंटे लगे रहने वाले अधिकारी और कर्मचारी कोरोना की गिरफ्त में आ रहे हैं। तमाम लोग बीमार भी हैं। यदि इनके इलाज की समुचित व्यवस्था नहीं की जाएगी तो विद्युत उत्पादन प्रभावित हो सकता है। इसलिए 30 सिलिडरों की तुरंत जरूरत है।

मीटर रीडरों को दी जाए विशेष अनुमति: उप्र पावर कार्पोरेशन ने अपर मुख्य सचिव अवनीश कुमार अवस्थी को पत्र लिखकर विद्युत कर्मियों की सुरक्षा की मांग की है। पत्र में कहा गया है कि मीटर रीडर घर-घर जाकर रीडिग लेते हैं। मगर, उनके लिए मास्क, सैनिटाइजर आदि किसी की कोई व्यवस्था नहीं है। ऐसे में वह हर समय खतरे में रहते हैं। इसलिए उन्हें इन चीजों को उपलब्ध कराया जाए। जिले में करीब 800 मीटर रीडर हैं, जो शहर से लेकर देहात में रीडिग लेते हैं। बिना मास्क आदि के उन्हें जाना पड़ता हैं। वहीं, लाकडाउन के समय मीटर रीडरों को विशेष अनुमति प्रदान की जाए। क्योंकि उन्हें घर-घर जाना पड़ता है।