अलीगढ़ (जेएनएन)।  खांडसारी शीरा की आड़ में सुगर मिल शीरा के अवैध कारोबार से माफिया फलफूल रहे हैं। एक पैसा प्रतिलीटर बिकने वाला शीरा फुटकर बाजार में आठ से नौ रुपये प्रति लीटर तक बेचा जा रहा है। शहर में हर रोज दो से तीन टैंकर सप्लाई होता है। डेढ़ करोड़ रुपये प्रतिमाह के इस अवैध कारोबार की ओर आबकारी विभाग भी गौर नहीं कर रहा।

एक हजार हैं ढलाई भट्ठियां

दरअसल, शहर में कोयले की 1000 ढलाई भट्ठियां हैं। पीतल की मूर्ति, हार्डवेयर आयटम (पीतल, सिल्वर व आयरन), इलेक्ट्रिक गुड्स, ऑटो पाट्र्स, मशीनरी पाट्र्स सहित एक दर्जन उत्पादनों की ढलाई होती है।

सांचे में ढलाई के लिए तैयार होने वाली मिट्टी में शीरा प्रयोग किया जाता है। गैर जनपद के शहरों में भी शीरा ड्रमों के जरिये बाहर जाता है। जैसे एटा जिले के जलेसर में पीतल के घुंघरू व घंटी के निर्माण में भी शीरा का प्रयोग होता है। कपड़ा धोने के साबुन में भी शीरा का प्रयोग होता है। शहर में शीरा के छह बड़े कारोबारी है।

नहीं किया लाइसेंस जारी 

शीरा की काला बाजारी रोकने के लिए कारोबारियों ने कई बार प्रयास किए। दि अलीगढ़ इलेक्ट्रिक मैन्युफैक्चर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष पवन गुप्ता व महासचिव विमल गुप्ता ने आबकारी विभाग से शीरा सप्लाई के लिए लाइसेंस लेने के लिए पत्राचार किया। आबकारी उपायुक्त ओपी सिंह ने 22 जनवरी को जारी पत्र में साफ कहा कि औद्योगिक क्षेत्र में शीरा की सप्लाई अथवा बिक्री के लिए लाइसेंस जारी नहीं किया जाता है। सिर्फ सरकारी व गैर सरकारी बीयर व वाइन की फैक्ट्री में सप्लाई होता है।

अवैध शराब में सप्लाई 

गंगा-यमुना व काली नदी के तटीय क्षेत्र में अवैध शराब का निर्माण होता है। सूत्रों ने बताया कि शीरा की बड़ी मात्रा में सप्लाई होती है। यह दूध की कैन में भरकर गंगा-यमुना के तटीय गांवों तक पहुंचता है। जिला आबकारी अधिकारी धीरज शर्मा का कहना है कि शुगर मिल से सप्लाई होने वाले शीरा की निगरानी का हमारे विभाग का जिम्मा है। शहर में अवैध शीरा की बिक्री हो रही है, वह हमारा कार्य क्षेत्र नहीं है। कारोबारी राजेंद्र कोल का कहना है कि  शहर में अधिकांश कारोबारी खांडसारी शीरा का प्रयोग करते हैं। यह प्रतिबंधित नहीं है। शुगर मिल से सीधे कोई माल मंगाता है तो वह संज्ञान में नहीं।

Posted By: Mukesh Chaturvedi