अलीगढ़ [सुरजीत पुंढीर]:  उनका कहना है कि दो महीने में लोगों ने एक ही स्थान पर रहकर बड़े घर की जरूरत को महसूस किया है। संक्रमण से बचने के लिए वे पुरानी व घनी आबादी को छोड़कर शहर के बाहर ठिकाना बनाने की सोचने लगे हैैं। शहर में बाहर इलाके में करीब पांच हजार छोटे-बड़े मकान तैयार खड़े हैैं।

रियल एस्टेट में मंदी

कई साल से रियल एस्टेट मंदी से गुजर रहा है। फ्लैट, प्लॉट की बिक्री तक नहीं हो पा रही है। अब कोरोना संक्रमण के चलते दो महीने से लॉकडाउन है। बिल्डरों का मानना है कि अधिकांश लोग घरों में ही हैं। तमाम लोग ऐसे हैं, जिन्हें अपनी व्यस्त जिंदगी में पहली बार इतने दिनों तक घर में रुकने का मौका मिला है और घर का दायरा बढ़ाने की जरूरत महसूस हुई है। सबसे अधिक दिक्कत घनी आबादी व पुराने आवासीय क्षेत्रों के लोगों को हो रही हैं। यहां कोरोना वायरस भी फैल रहा है। यहां के लोगों की ङ्क्षजदगी डरी-डरी सी हो गई है। बिल्डरों का मानना है कि हर किसी की चाहत सुरक्षात्मक माहौल व सुविधाओं वाले घरों में रहने की होती है। लॉकडाउन में छोटे घरों वाले लोगों ने इन्हीं चीजों को ज्यादा महसूस किया है। जैसे-जैसे आॢथक गतिविधियां बढ़ेंगी। रियल एस्टेट सेक्टर में भी मांग बढऩे लगेगी। सरकार की ओर से हाल में भारी-भरकम आॢथक पैकेज भी दिया गया है। इससे भी लोगों को फायदा मिलेगा। बैैंक भी घर खरीदने के लिए लोन दे सकते हैैं।

आबादी से बाहर आशियाना

शहर में 85 फीसद आबादी घनी है। लॉकडाउन में लोगों ने बड़े घर की जरूरत को महसूस किया है। वे घनी आबादी से बाहर आशियाना बनाने की सोचने लगे हैैं। एक माह में मेरे पास मकान व प्लाट खरीदने के इच्छुक कई लोगों के फोन आ चुके हैैं।

प्रवीण मंगला, चेयरमैन ओजोन ग्रुप

रियल एस्टेट के हालात खराब

कई साल से रियल एस्टेट के हालात खराब हैं। तमाम फ्लैट तैयार खड़े हैं।  इनकी बिक्री में तेजी आने की उम्मीद है, लेकिन विकास प्राधिकरण को अवैध निर्माण पर रोक लगानी होगी। 

योगेश गुप्ता कावेरी, बिल्डर

घर बड़ा होना चाहिए

दो महीने से घर में हूं। मेरा संयुक्त परिवार है। लॉकडाउन में परिवार के सभी सदस्यों के इकट्ठे होने से मुझे महसूस हुआ कि घर बड़ा होना चाहिए। मैैं मकान या प्लॉट खरीदने की सोच रहा हूं।

ओमवीर, कारोबारी

Posted By: Sandeep Saxena

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