अलीगढ़, जागरण संवाददाता। जिले में डेंगू का डंक रोजाना, कहीं न कहीं लोगों की जान ले रहा है। हैरानी की बात ये है कि स्वास्थ्य विभाग डेंगू की रोकथाम से ज्यादा आंकड़ों को दुरुस्त करने में अधिक गंभीरता दिखा रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग की ओर से शनिवार को फिर दावा किया गया कि जनपद में अब तक डेंगू से कोई मौत नहीं हुई है। करीब 15 बुखार व अन्य बीमारियों से हुई। स्वास्थ्य विभाग के ये दावे किसी के गले नहीं उतर रहे।

सरकारी आंकड़ों में 727 डेंगू रोगी मिले

जिले में अब तक सैकड़ों डेंगू के मरीज मिल चुके हैं। स्वास्थ्य विभाग ने शनिवार तक 727 डेंगू रोगियों की पुष्टि की। 500 से अधिक मरीज तो सरकारी अस्पतालों में ही भर्ती हैं। हकीकत ये है कि इससे कहीं ज्यादा मरीज इस समय निजी अस्पतालों में उपचार करा रहे हैं। डेंगू का स्ट्रेन-टू घातक होने के कारण मरीजों को गंभीर लक्षण भी उभर रहे हैं। इसमें ब्लीडिंग भी शामिल हैं। तेजी से प्लेटलेट्स गिरने के कारण मरीजों को बचाना मुश्किल हो रहा है।

एलाइजा रिपोर्ट को ही मान रहा विभाग

शहर में ग्रामीण क्षेत्र से रोजाना ऐसे मरीजों की मृत्यु की सूचना मिल रही है, जो डेंगू का ट्रीटमेंट ले रहे थे। दरअसल, अब चिकित्सक रिपोर्ट का इंतजार किए बगैर लक्षण के आधार पर उपचार शुरू कर कर हैं, इसका फायदा स्वास्थ्य विभाग आंकड़ों को दुरुस्त करने में ले रहा है। यही वजह है कि यदि किसी की मृत्यु होती है और उसने एलाइजा टेस्ट नहीं कराया है तो उसकी मृत्यु डेंगू से नहीं मानी जा रही है। यही नहीं, एक खेल और भी है। यदि एलाइजा टेस्ट में पाजिटिव आया मरीज उपचार के मध्य निगेटिव हो जाता है और उसके बाद मृत्यु होती है तो विभाग उसे भी डेंगू से मृत्यु नहीं मान रहा। मरीजों के अनुसार कोरोना काल में भी आकड़े छुपाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने यही फंडा आजमाया था। तब भी सैकड़ों मरीजों की जान गई और सरकारी आंकड़ों में मात्र 108 मरीजों की मृत्यु दर्ज हुई।

इनका कहना है

प्रत्येक मृत्यु की सूचना पर विभागीय टीम मौके पर पहुंचकर डेथ आडिट करती है। ज्यादातर मामलों में मरीज की मृत्यु का कारण हेपेटाइटिस, निमोनिया या बुखार ही सामने आया। मृतकों में डेंगू का कोई मरीज नहीं पाया गया, जिसकी पुष्टि एलाइजा टेस्ट से होती है।

- डा. आनंद उपाध्याय, सीएमओ।

Edited By: Anil Kushwaha